
Jaswant Singh Khalra Lawyer Reacts After Satluj Removed:दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को रिलीज के दो दिन बाद ही Zee5 से हटाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। अब जसवंत सिंह खालरा मामले से जुड़े वकील नवकिरण सिंह ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों पर बेस्ड है और इसका खालिस्तान सपोर्ट विचारधारा से कोई संबंध नहीं है। तो वहीं, पूर्व आईएएस अधिकारी केबीएस सिद्धू का मानना है कि फिल्म हटाने का फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर लिया गया होगा।
हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी 'सतलुज' का प्रीमियर 3 जुलाई को Zee5 पर बिना किसी प्रचार अभियान के हुआ था। हालांकि रिलीज के दो दिन के भीतर ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। Zee5 ने कहा कि वो फिल्म और इसके निर्माताओं के साथ खड़ा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे फिलहाल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
जसवंत सिंह खालरा की मानवाधिकार टीम का हिस्सा रहे और उनकी पत्नी परमजीत कौर खालरा की ओर से CBI केस लड़ने वाले वकील नवकिरण सिंह ने फिल्म हटाने के फैसले को गलत बताया। इस पर उन्होंने कहा कि फिल्म पहले ही कई बदलावों और शीर्षक परिवर्तन से गुजर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद इसमें वही तथ्य दिखाए गए हैं जो रिकॉर्ड में मौजूद हैं। उनके मुताबिक, 2,097 ऐसे अंतिम संस्कारों का रिकॉर्ड मिला था जिनमें अज्ञात लोगों का अंतिम संस्कार किया गया था। उन्होंने याद दिलाया कि 6 सितंबर 1995 को पुलिस जसवंत सिंह खालरा को उनके घर से लेकर गई थी और उससे एक सप्ताह पहले उनकी मुलाकात भी हुई थी।
नवकिरण सिंह ने बताया कि इस मामले की पैरवी करने वालों को गंभीर खतरे झेलने पड़े। उनके अनुसार, इस केस से जुड़े 4 वकीलों की हत्या कर दी गई थी और उन पर भी हमला हुआ था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में परमजीत कौर खालरा का प्रतिनिधित्व करने के बाद इस मामले को मानवाधिकार केस के रूप में देखा गया और टीम ने जरूरी सबूत और दस्तावेज जुटाए। उनका कहना था कि फिल्म को हटाने या रिलीज न होने देने से राजनीतिक असर पड़ सकता है, लेकिन इससे खालिस्तान समर्थक भावनाओं को बढ़ावा नहीं मिलेगा।
1992 से 1996 के बीच अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी केबीएस सिद्धू ने कहा कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं CBI जांच के दौरान सामने आए तथ्यों पर आधारित हैं। उन्होंने बताया कि सितंबर 1995 में जसवंत सिंह खालरा के कथित अपहरण के अगले ही दिन उन्होंने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। उस समय तरनतारन के तत्कालीन एसएसपी अजीत संधू से संपर्क नहीं हो सका था। बता दें, सिद्धू ने कहा कि इस मामले से जुड़े कई प्रमुख लोग, जिनमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह, पूर्व डीजीपी केपीएस गिल और पूर्व एसएसपी अजीत संधू शामिल हैं, अब जीवित नहीं हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अदालत ने आखिरकार खालरा परिवार को न्याय दिया और इस मामले में कई पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया।
'सतलुज' में दिलजीत दोसांझ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी लीड रोल में हैं। ये फिल्म पहले 'पंजाब '95' नाम से बनाई गई थी और रिलीज से पहले कई विवादों में रही।
2022 में इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास भेजा गया था, लेकिन निर्माताओं का आरोप था कि बोर्ड ने 127 कट लगाने की मांग की थी और फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं मिला। इसके अलावा, 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रस्तावित इसकी स्क्रीनिंग भी भारतीय अधिकारियों की कथित आपत्तियों के बाद रद्द कर दी गई थी। Zee5 पर सीमित समय के लिए रिलीज होने के दौरान फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। बाद में इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इस पर दिलजीत दोसांझ ने कहा था कि फिल्म दर्शकों तक पहुंच चुकी है और ऑनलाइन भी देखी जा रही है।