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‘एनिमल’ से ‘वध’ तक नेगेटिव रोल निभाने वाले सौरभ सचदेवा ने टाइपकास्टिंग पर तोड़ी चुप्पी, बोले- ‘मैं खुद को एक दायरे में नहीं बांधता’

Saurabh Sachdeva on Typecasting: रामयण में मारीच का किरदार निभाने वाले अभिनेता सौरभ सचदेवा ने टाइपकास्टिंग को लेकर बेबाक राय रखी है। उन्होंने कहा कि कलाकारों को एक जैसे किरदार मिलने के लिए फिल्म इंडस्ट्री को दोष नहीं देना चाहिए, बल्कि यह उनकी अपनी लिमिटेशन है।
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Updated: 8 Nov 2026, 1:58 PM IST
Saurabh Sachdeva on Typecasting
रामायण के 'मारीच' सौरभ सचदेवा ने टाइपकास्टिंग पर की बात। (फोटो सोर्स: IMDb)

Saurabh Sachdeva on Typecasting: एक्टर और एक्टिंग कोच सौरभ सचदेवा का कहना है कि वह नेगेटिव किरदारों को सिर्फ 'विलेन' के रूप में नहीं देखते, बल्कि उन्हें अलग-अलग व्यक्तित्व और मकसद वाले इंसानों के तौर पर देखते हैं। 'एनिमल', 'वध', 'जाने जान' और 'धड़क 2' जैसी फिल्मों में गहरे और जटिल किरदारों के लिए मशहूर सचदेवा का मानना ​​है कि भले ही दर्शक उनके किरदारों को नेगेटिव मानें, लेकिन वह हर किरदार को अलग नजरिए से देखते हैं और इंसानी व्यवहार की बारीकियों को तलाशते हैं।

पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में सचदेवा ने कहा, "लोग आपको 'टाइपकास्ट' कर सकते हैं, लेकिन किरदारों को आकार तो मुझे ही देना है। अगर आप मेरे सभी नेगेटिव किरदारों को देखेंगे, तो शायद कहें कि 'अरे, यह तो एक नेगेटिव किरदार है', लेकिन असल में वे अलग-अलग इंसान हैं, जिनके व्यक्तित्व भी अलग-अलग हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "इंसानी व्यवहार में खोजने के लिए बहुत कुछ है। यही वह चीज है जिसे हम अक्सर देख नहीं पाते। अगर हम इसे देख पाएं, तो मेरे पास करने के लिए बहुत कुछ होगा।"

अगर मैं कहूं कि मैं 'टाइपकास्ट' हो गया हूं, तो यह मेरी अपनी कमी है

नितिश तिवारी की 'रामायण' में एक अहम भूमिका निभा रहे सचदेवा का मानना ​​है कि 'टाइपकास्ट' होने के लिए एक्टर्स को इंडस्ट्री को दोष नहीं देना चाहिए। उनके अनुसार, यह खुद एक्टर पर निर्भर करता है कि वह खुद को किसी एक खास छवि (इमेज) तक सीमित रहने देता है या नहीं।

"अगर मैं कहूं कि मैं 'टाइपकास्ट' हो गया हूं, तो यह मेरी अपनी कमी है। इसका मतलब है कि मैंने खुद को एक दायरे में कैद कर लिया है, और लोग मुझे उसी दायरे से देखेंगे। जैसे, आप किसी किरदार को नेगेटिव मान सकते हैं, लेकिन मैं उसे एक ऐसे इंसान के रूप में देखता हूं जिसकी अपनी समस्याएं, संघर्ष और रुकावटें हैं, जिन्हें मुझे पार करना होता है।"

"और ये रुकावटें इतनी मजबूत होनी चाहिए कि वे मुख्य किरदार (प्रोटागोनिस्ट) को और बेहतर तरीके से उभार सकें। जैसे, फिल्म 'वध' में अगर विलेन मजबूत न हो, तो मुख्य किरदार कुछ खास नहीं कर पाएगा।" इसलिए, मुझे इसे उस स्तर तक ले जाना है।"

एक्टिंग से पहले एक्टिंग कोच के तौर पर काम करते थे सौरभ सचदेवा

एक्टिंग में आने से पहले, सचदेवा कैमरे के पीछे एक एक्टिंग कोच के तौर पर काम करते थे। उनका मानना ​​है कि एक एक्टर के तौर पर उनकी शुरुआत में देरी होने की वजह उनका खुद पर शक करना था।

उन्होंने जॉन अब्राहम, बॉबी देओल, वरुण धवन, अर्जुन कपूर, ऋचा चड्ढा, दुलकर सलमान, राणा दग्गुबाती, तृप्ति डिमरी, अविनाश तिवारी, हर्षवर्धन राणे और राघव जुयाल समेत कई एक्टर्स को ट्रेनिंग दी है।

उन्होंने कहा, "यह मेरी अपनी कमी थी। मैं इस सोच के साथ काम कर रहा था कि 'मैं काफी नहीं हूँ, मैं छोटा हूँ'। मेरे कुछ कोचों ने मुझे इस सोच को सुधारने, इससे निपटने और आगे बढ़ने में मदद की। इसलिए, जब से यह कमी दूर हुई है, मैं लगातार आगे ही बढ़ता जा रहा हूँ।"

2017 में फिल्म 'मरून' से की एक्टिंग की शुरुआत

सचदेवा ने 2017 में फिल्म 'मरून' से एक्टिंग की शुरुआत की, लेकिन उन्हें नेटफ्लिक्स सीरीज 'सेक्रेड गेम्स' में सुलेमान ईसा के किरदार से पहचान मिली। इसके बाद वे 'मनमर्जियां', 'लाल कप्तान', 'वध', 'एनिमल', 'हड्डी', 'काला', 'जाने जान', 'पुष्पा 2: द रूल' और 'सतलुज' जैसी कई फिल्मों में नजर आए।

अनुराग कश्यप और नितेश तिवारी के बारे में भी की बात

रामायण एक्टर ने कहा, "जब 'सेक्रेड गेम्स' आई, तो मैं हैरान रह गया कि स्क्रीन टाइम बहुत कम होने के बावजूद मेरा किरदार इतना बड़ा बन गया। लोगों से मिले प्यार को देखकर मैं सच में हैरान था।" इसके आगे उन्होंने कहा, "जब लोग कहते हैं कि यह कुछ नया है, 'सतलुज' और 'एनिमल' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये दोनों किरदार जो एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं - तो मुझे लगता है कि यह एक तारीफ है, जैसे कि मैंने अपना काम बहुत अच्छे से किया हो।" "मुझे खुशी है।"

सचदेवा ने बताया कि अनुराग कश्यप और नितेश तिवारी जैसे फिल्म निर्माताओं के साथ काम करने से उन्हें अलग-अलग तरह के रचनात्मक स्वभाव और काम करने के तरीकों के हिसाब से खुद को ढालना सीखने को मिला है। उन्होंने कहा, "अनुराग ने मुझे सिखाया है कि जल्दबाजी और दबाव में कैसे काम किया जाता है। वे हमेशा काम में लगे रहते हैं, कलाकारों को खाली नहीं बैठने देते। अगर आप कहें कि 'मैं नर्वस हूँ', तो वे कहते हैं, 'नहीं, चलो कुछ नया बनाते हैं'।"

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8 Nov 2026, 1:58 PM IST
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