
Ujjwal Nikam on Sanjay Dutt: अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों से अवैध हथियार रखने के मामले में गिरफ्तार हुए बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त का बचाव देश के बड़े वकीलों ने किया था। बावजूद इसके उन्हें जेल की सजा हुई। सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने उनके लिए किसी भी तरह की रियायत का विरोध किया था। निकम के मुताबिक, फैसला सुनाए जाने के दिन संजय दत्त घबराए हुए थे, जबकि सख्त सजा की मांग करने पर मीडिया ने उनको ही विलेन बना दिया था।
हाल ही में लल्लनटॉप से बात करते हुए उज्ज्वल निकम ने कहा, "जब भी संजय दत्त रोते थे, लोग इसके लिए मुझे जिम्मेदार ठहराते थे। मीडिया किसी व्यक्ति के बारे में लोगों की राय बना सकता है। जब कोर्ट ने संजय दत्त के खिलाफ फैसला सुनाया, तो जाहिर है कि वो डरे हुए थे। वो जमानत पर बाहर थे, लेकिन कोर्ट ने उन्हें हिरासत में लेने का आदेश दिया।"
कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए निकम ने कहा, "संजय दत्त को 'प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट' का लाभ नहीं मिलना चाहिए था। उनका तर्क था कि संजय दत्त के पास जो अवैध पिस्तौल मिली थी, वो दाऊद इब्राहिम के शूटर से आई थी, इसलिए उन्हें उसके आपराधिक संबंधों की जानकारी थी। ऐसे में उन्हें पहली बार गलती करने वाला मानकर राहत नहीं दी जानी चाहिए थी और आर्म्स एक्ट के तहत 7 साल की सजा मिलनी चाहिए थी।"
इसके आगे निकम ने बताया कि संजय ने अपना बचाव करने के लिए देश के सबसे बड़े वकीलों को हायर किया था। उन्होंने कहा, "उन्होंने देश के सबसे अच्छे कानूनी जानकारों को काम पर रखा था, जबकि मैं सरकारी वकील था। आखिरकार, कोर्ट मेरी बात से सहमत हुआ और उन्हें सात साल की जेल की सजा सुनाई।"
कोर्ट के फैसले के बाद संजय के रिएक्शन के बारे में बताते हुए निकम ने कहा, “जब फैसला सुनाया गया, तो वो कांप रहे थे। वो बार-बार कह रहे थे, ‘नहीं सर, मैंने कुछ गलत नहीं किया है, सर। मैं वापस आऊंगा।’ मैं पास ही खड़ा था, वो सच में कांप रहे थे और मैंने उनसे कहा, ‘संजू, मीडिया देख रहा है, प्लीज सीधे खड़े हो जाओ।’ फिर मैंने पुलिस से उन्हें ले जाने के लिए कहा। अगर मैंने उस समय उन्हें हिम्मत नहीं दी होती, तो मीडिया मुझे विलेन बना देता। हर कोई मेरे खिलाफ था।”
सख्त सजा की मांग करने के बावजूद, निकम ने कहा कि उन्होंने कभी भी संजय दत्त को आतंकवादी नहीं माना। उन्होंने कहा, “मैं बताना चाहता हूं कि संजय दत्त आतंकवादी नहीं हैं। ये उनकी नादानी थी। आप इसे उनकी आंखों में देख सकते थे। उन्हें हथियारों में दिलचस्पी थी, और उस समय बहुत से लोग अंडरवर्ल्ड से आकर्षित थे। उनसे जुड़ा होना एक तरह का दिखावा या रुतबा माना जाता था।”
हालांकि, निकम ने ये भी कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि संजय 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों को रोकने में मदद कर सकते थे। “जब अबू सलेम हथियारों से भरा ट्रक लेकर आया, तो संजय दत्त ने कुछ हथियार रख लिए और बाकी लौटा दिए। मेरा कहना है कि अगर उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी होती, तो हम बम धमाकों को रोक सकते थे। साजिश का पर्दाफ़ाश हो सकता था, कई जाने बच सकती थीं, और इसमें शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता था। उनके खिलाफ मेरी यही शिकायत थी। लेकिन वह आतंकवादी नहीं थे।”
कोर्ट में आमना-सामना होने के बावजूद, निकम ने कहा कि अब दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा, “रिहा होने के बाद मैं उनसे मिला। उसके बाद भी मैं उनसे कई बार मिला हूं। वो मेरा सम्मान करते हैं। एक बार मैं एक होटल में था, तब वो मेरे पास आए और मुझसे बात की। मेरी किसी से कोई जाती दुश्मनी नहीं है।”