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‘मैं अब थक चुका हूं’, पर्दे पर सबसे बड़े रेड फ्लैग कहलाने से परेशान हुए विजय वर्मा, बोले- कुछ अलग करना है

Vijay Varma Red Flag: अभिनेता विजय वर्मा ने हाल ही में फिल्मों में अपने किरदारों को लेकर बात की है। विजय ने बताया है कि अब वो एक ही तरह का रोल करके थक चुके हैं और उन्हें बदलाव की जरूरत है।
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Oct 05, 2026
Vijay Varma On lust Stories 3
विजय वर्मा (फोटो सोर्स- IMDb)

Vijay Varma On lust Stories 3: अभिनेता विजय वर्मा इन दिनों अपनी फिल्म 'लस्ट स्टोरीज 3' को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में उन्हें 'स्क्रीन पर सबसे बड़ा रेड फ्लैग' कहा गया। विजय वर्मा ने अब इस टैग पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वो लगातार 'रेड फ्लैग' और 'ग्रीन फ्लैग' जैसे लेबल सुनकर थक चुके हैं और अब उन्हें कोई दूसरा रंग चाहिए।

डॉली सिंह के कार्यक्रम में बोले विजय वर्मा

दरअसल, कंटेंट क्रिएटर डॉली सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान विजय वर्मा को स्क्रीन पर ‘सबसे बड़ा रेड फ्लैग’ बताया था। उन्होंने अभिनेता के ‘डार्लिंग्स’, ‘दहाड़’ और ‘पिंक’ जैसे प्रोजेक्ट्स में निभाए गए ग्रे और नकारात्मक शेड वाले किरदारों का हवाला दिया। इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद कई लोगों ने कहा कि विजय इस टिप्पणी से कुछ असहज नजर आए।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय ने कहा कि वो अब इस तरह के टैग से थक चुके हैं। अभिनेता ने कहा कि उन्हें अब कोई दूसरा रंग चाहिए, क्योंकि वह ‘रेड फ्लैग’ और ‘ग्रीन फ्लैग’ सुन-सुनकर परेशान हो चुके हैं।

'लस्ट स्टोरीज 3 का किरदार पसंद आया'

विजय ने ये भी बताया कि ‘लस्ट स्टोरीज 3’ में उनका किरदार उन्हें इसलिए पसंद आया, क्योंकि वह उनके पहले के किरदारों से काफी अलग था। उन्होंने बताया कि इस फिल्म में उनका किरदार किसी संकेत को समझ ही नहीं पाता। विजय के मुताबिक, उन्होंने अब तक ऐसे कई किरदार निभाए हैं, जो सामने वाले के संकेतों को आसानी से समझ लेते थे, इसलिए ऐसा किरदार निभाना उनके लिए नया और दिलचस्प अनुभव था।

महिलाओं की सुरक्षा पर बोले विजय वर्मा

दिल्ली और बिहार में महिलाओं से जुड़ी हालिया घटनाओं के बीच विजय वर्मा ने पुरुषों की जिम्मेदारी पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पुरुषों को महिलाओं के रास्ते से हटना सीखना चाहिए, ताकि महिलाएं बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात और पसंद जाहिर कर सकें।

विजय ने कहा कि पुरुषों को महिलाओं को जज करने, उनका मजाक उड़ाने या उन्हें कमतर महसूस कराने के बजाय उनकी बातें सुननी चाहिए और उनसे सीखना चाहिए। उनके मुताबिक, पुरुषों को संवेदनशील होने की शिक्षा घर से मिलनी चाहिए, लेकिन कई बार बेटों को जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार दिया जाता है, जिसे उन्होंने ‘मेरा राजा बेटा’ वाली मानसिकता बताया।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई लड़की सोशल मीडिया पर पीरियड पेन जैसी अपनी समस्या के बारे में बात कर रही है, तो पुरुषों को हर मामले में टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। विजय का कहना है कि महिलाओं के अनुभवों को समझने और उनकी बात सुनने की कोशिश करना पुरुषों के लिए सबसे जरूरी कदमों में से एक है।

Updated on:
05 Oct 2026 01:00 pm
Published on:
05 Oct 2026 12:58 pm
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