पत्थर दिल सिस्टम ने उसको कंधे पर सरे बाजार इंसानियत की लाश ढोने पर मजबूर कर दिया।
बदायूं। उसके कंधे पर लाश थी, पैर डगमगा रहे थे लेकिन चेहरे पर भाव स्थिर। कहने को तो उसने आज पत्नी खोई थी लेकिन पत्थर दिल सिस्टम ने उसको कंधे पर सरे बाजार इंसानियत की लाश ढोने पर मजबूर कर दिया। पत्नी की लाश को कंधे पर ढोते इस व्यक्ति से हर कोई पूछ रहा था कि एंबुलेंस नहीं मिली, जवाब में हां की तस्दीक करते हुए सिर हिलाता और बार-बार एक ही बात कहता 'साहब कोई टैम्पो करवा दो'।
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कंधे पर पत्नी का शव लेकर निकला
जी हां, ऐसा ही दिल बैठा देने वाला नजारा आज बदायूं में देखने को मिला। जिला अस्पताल में एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल से शव ले जाने के लिए एंबुलेंस या किसी अन्य वाहन का इंतजाम भी न हो सका। मृतका का पति लगातार कहता रहा कि मेरी पत्नी की मौत हो गई है, गाड़ी करवा करवा दीजिए, पैसे नहीं हैं। शव ले जाने के लिए उसे वाहन की आवश्यकता है लेकिन किसीने उसकी एक न सुनी।
अंत में थक हार कर वह जिला अस्पताल से अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लाद कर बाहर निकल आया। सड़क पर भी लोगों की भीड़ लग गई लेकिन मदद के लिए कोई हाथ आगे नहीं बढ़ा। यह नजारा देख एक पत्रकार का दिल पसीजा और उसने उसको ₹200 दिए दिए ताकि वो शव को अपने घर ले जाये।
सीएम ने दिए जांच के आदेश
वहीं इस मामले में जब हमने सीएमओ से बात की तो उन्होंने इस घटना पर दुख तो व्यक्त कर दिया लेकिन ऐसा क्यों हुआ इसका कोई मुकम्मल जवाब नहीं दे सके। अंत में हर बार की तरह इस मामले की ङी जांच की बात कर पल्ला झाड़ लिया।