
police found body in ambulence
सदर थाने के बाहर गुजरात से कोटपूतली एक युवक का शव लेकर जा रही एम्बुलेंस वहीं खड़ी हो गई। शव लेकर साथ आया ठेकेदार वहां से इधर उधर हो गया। मामले की जानकारी मिलने पर मृतक युवक के रिश्तेदार मौके पर पहुंचे। युवक की मौत संदिग्ध हालात में होना मानते हुए उन्होंने शव को आगे ले जाने का विरोध किया।
मृतक के रिश्तेदारों ने बताया कि ब्यावर निवासी एक ठेकेदार कोटपूतली से युवकों को गुजरात कुएं की खुदाई के लिए लेकर गया था। बुधवार को ठेकेदार ने जानकारी दी कि युवक की कुएं में गिरने से मौत हो गई। वह शव लेकर ब्यावर आ रहा है। इससे पहले कि मृतक के रिश्तेदार बाइपास पहुंचते एम्बुलेंस को थाने के बाहर खड़ा करके ठेकेदार इधर उधर हो गया।
मृतक के रिश्तेदारों ने बताया कि एम्बुलेंस चालक के पास गुजरात के किसी थाने या अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाए जाने की रिपोर्ट तक नहीं थी। ऐसे में रिश्तेदार युवक की मौत को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। रिश्तेदारों ने ठेकेदार के नहीं आने तक एम्बुलेंस को आगे कोटपूतली नहीं ले जाने दिया। वहीं सदर पुलिस का कहना था कि मामला गुजरात का है। यहां पर शिकायत भी नहीं है। इसी कारण वह कार्रवाई नहीं कर सकते। खबर लिखे जाने तक एम्बुलेंस के साथ शव थाने के बाहर ही रखा रहा।
रहता है एम्बुलैंस का जमावड़ा
राज्य के प्रत्येक शहर में सरकारी और निजी अस्पतालों के बाहर एम्बुलैंस का जमावड़ा रहने लगा है। यह एम्बुलैंस चालक मनमाने पैसे लेकर कोई भी कामकाज करने को तैयार हो जाते हैं। कई एम्बुलैंस के फिटनेस भी नहीं हैं। खासतौर पर डेड बॉडी लाने-ले जाने को लेकर यह चालक मुहंमांगे पैसे वसूलने से भी नहीं चूकते हैं।
बना रखी हैं यूनियन
एम्बुलैंस संचालकों ने भी यूनियन बना रखी है। पुलिस और प्रशासन के सख्ती करने पर यह नेतागिरी करने पहुंच जाते हैं। एम्बुलैंस संचालकों पर सख्ती का खामियाजा कई बार मरीजों और उनके रिश्तेदारों को भुगतना पड़ता है। राज्य के छोटे और बड़े अस्पतालों के बाहर अमूमन 25 से 100 एम्बुलैंस का जमवाड़ा रहता है।
Published on:
05 May 2018 09:27 am
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