बुलंदशहर

कोर्ट का अनोखा फरमान, कुर्ता-पैजामा गलत सिला इसलिए तुरंत लौटाएं सिलाई की कीमत

न्यायलय जिला उपभोक्ता आयोग ने कुर्ता-पजामा गलत सिलने पर आरोपी दर्जी को वादी के कपड़े की सिलाईए उसकी कीमत और हर्जाना ब्याज समेत अदा करने का फैसला सुनाया है।
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Updated: 6 Sep 2022, 11:29 AM IST
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यूपी के बुलंदशहर में एक दर्जी को गलत कुर्ता-पजामा सिलना भारी पड़ गया। कोर्ट ने उसे वादी को कपड़े की कीमत का हर्जाना भरने का फरमान जारी किया है। हालांकि बात तब और बिगड़ गई जब कोर्ट ने उसे नोटिस जारी किया और उसके बाद भी दर्जी ने जवाब दाखिल नहीं किया। जिसके बाद कोर्ट ने अपने फैसले में दर्जी को वादी के कपड़े की सिलाई, उसकी कीमत और हर्जाना ब्याज समेत अदा करने का फैसला सुनाया है। वहीं ऐसा न करने पर उक्त समस्त धनराशि पर निर्धारित अवधि के बाद से तारीख भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी आरोपी के द्वारा देय होने का फैसला सुनाया है।

दी गई नाप के अनुसार नहीं की सिलाई

इस संबंध में न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग के पीए शेखर वर्मा ने बताया कि डीएम कॉलोनी निवासी एमपी सिंह ने न्यायलय जिला उपभोक्ता आयोग में मुकदमा दायर किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि साल 2018 में 5 मई को उन्होंने कुर्ता-पजामा सिलने को कपड़ा काला आम स्थित शर्मा इंटर कालेज मार्केट में स्थित सिल्को टेलर्स एण्ड फैब्रिक्स के प्रोपराईटर अबरार अहमद अंसारी को दिया था। 13 मई 2018 को जब कपड़े मिले तो कुर्ता-पजामा की सिलाई दी गई नाप के अनुसार नहीं थी। जब उसने दर्जी से शिकायत की तो दर्जी ने उनकी एक न सुनी और कपड़े की सिलाई ठीक करने से मना किया।

कोर्ट ने आरोपी दर्जी को सुनाया ये फैसला

उन्होंने बताया कि दर्जी के साफ मना कर देने के बाद पीड़ित एमपी सिंह ने सिल्को टेलर्स के खिलाफ आयोग के समक्ष मुकदमा दायर किया। कोर्ट से ऑर्डर मिलने के बाद भी सिल्को टेलर्स का दर्जी तारीख पर कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। न ही उसने कोई जबाव दाखिल किया। जिसपर जिला आयोग के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह, सामान्य सदस्य मोहित कुमार त्यागी और महिला सदस्य नीलम कुमारी ने पीड़ित का पक्ष सुना और उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए आरोपी को दो महीने में पीड़ित के कपड़ों की सिलाई कीमत 750 रुपये और कपड़ों की कीमत 1500 रुपये 15 मई 2018 से तारीख भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का फैसला सुनाया है।

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