जयपुर विद्युत प्रसारण निगम 12 साल पहले सहकारी चीनी मिल से खरीदी गई बहुमूल्य भूमि का उपयोग नहीं कर पाया।
केशवरायपाटन. जयपुर विद्युत प्रसारण निगम 12 साल पहले सहकारी चीनी मिल से खरीदी गई बहुमूल्य भूमि का उपयोग नहीं कर पाया। इस भूमि पर दो दशक पहले फसले लहलहाती थी, लेकिन अब वहा जंगल उग गया। राज्य सरकार, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व निगम की अनदेखी की वजह से इस भूमि पर लोग अतिक्रमण करने लग गए हैं। जिम्मेदार अफसरों ने तो मानो इस ओर ध्यान ही नहीं दिया है।
निगम ने 12 साल पहले बंद सहकारी चीनी मिल की 458 बीघा भूमि 56 करोड़ में खरीदी थी। उसी के पास नगर पालिका की 146 बीघा जमीन 23 करोड़ में खरीदी गई। निगम ने 12 साल पहले लगभग 604 बीघा कृषि योग्य भूमि 79 करोड़ में खरीद कर अपने नाम करवा ली, लेकिन निगम व सरकार की अनदेखी की वजह से अब उसमें जंगल उग आया। राज्य सरकार ने निगम के माध्यम से यह भूमि यहां पर गैस आधारित विद्युत पावर प्लांट लगाने के लिए खरीदी थी, लेकिन राज्य सरकार इस भूमि का उपयोग नहीं कर पाई। पावर प्लांट भी नहीं लगा पाए।
निगम ने लगभग 100 बीघा भूमि वह भी खरीद डाली, जिस पर लोगों ने कब्जा कर रखा था और कब्जा मुक्त भी नहीं करवाया। विभागीय अनदेखी की वजह से अब उपजाऊ भूमि जंगल में बदल गई। करोड़ों की बेशकीमती जमीन अब मवेशियों व जानवरों की शरणस्थली बन कर रह गई है। रेलवे स्टेशन के सामने स्थित इस भूमि पर सहकारी चीनी मिल की ओर से फसल की जाती थी, लेकिन मिल बंद होने के बाद राज्य सरकार ने इसे बेच कर मिल की देनदारी चुकानी पड़ी थी।
निगम के अधिकारी चाहते तो इस उपजाऊ भूमि को ज्वारा काश्त में देकर सालाना एक करोड़ रुपए की आमदनी कर सकता था, लेकिन किसी अधिकारी ने इस बारे में ध्यान नहीं दिया। सरकार भी इस बारे में गंभीर नहीं है। 12 सालों में प्रदेश में भाजपा व कांग्रेस की सरकारें बनी, लेकिन दोनों ही दलों की सरकारें इसका निस्तारण नहीं कर पा रही है।
लगे उद्योग तो मिले रोजगार
राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में सरकारी चीनी मिल व नगरपालिका से 604 बीघा जमीन गैस आधारित विद्युत पावर लगाने के लिए खरीदी थी। भाजपा व कांग्रेस की सरकारें रह चुकी, लेकिन की गई घोषणा 12 वर्षों से कागजों में दबी हुई है। इस पर अमल नहीं होने से यह बेशकीमती भूमि वीरान हो चुकी है। अब इस पर अतिक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। 100 बीघा में तो अभी अतिक्रमण कर रखा है। अब देखरेख के अभाव में भू माफिया की नजर इस भूमि पर लगी हुई है। समय रहते इस भूमि का उपयोग नहीं किया गया तो इस पर अतिक्रमण किया जा सकता है।
किसान है परेशान
जयपुर विद्युत प्रसारण निगम कि इस भूमि में जंगल उगने से क्षेत्र के किसान परेशान हैं। किसानों ने बताया कि इस जंगल में रोजडे, हरिण, नील गाय ने अपना डेरा जमा रखा है। यह यहां से निकलकर कभी आबादी में चले जाते हैं तो कभी किसानों की फसलों में घुस जाते हैं। किसानों को फसलों की रखवाली के लिए रात दिन खेतों में रहना पड़ रहा है।
नहीं मिला जीएसएस का लाभ
जयपुर विद्युत प्रसारण निगम ने मिल की जमीन खरीद कर कोटा दौसा मेगा स्टेट हाइवे पर पंचायत समिति के सामने 132 केवी जीएसएस खोला तो उपखंड के लोगों का लगा था कि अब विद्युत संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन फिर भी उपखंड में प्रतिदिन बार बार बिजली जाने की समस्या बरकरार है। उपखंड के गांवों में तो बिजली कटौती का रिकॉर्ड बनता जा रहा है, लेकिन उपखंड मुख्यालय व कापरेन में बार बार बिजली गुल होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उपखंड को जो लाभ मिलना चाहिए था वह नहीं मिल रहा है। लोगों को इस भीषण गर्मी में विद्युत संकट का सामना करना पड़ रहा है।
जमीन मिल को सौंपें
राज्य सरकार जयपुर विद्युत प्रसारण निगम की जमीन को मिल को सौंपी कर राष्ट्रीय सहकारी शुगर मिल संघ की रिपोर्ट का अध्ययन कर उसके आधार पर मिल का संचालन करने का रास्ता खोजें। मिल पर देनदारियां अधिक होने पर यह जमीन निगम को देकर देनदारियां चुकाई थी। उस समय इस जमीन पर ऊर्जा प्लांट लगाने की बात की थी जो नहीं लगाया गया। सरकार निर्णय ही नहीं कर पा रही है।
दशरथ कुमार शर्मा, महामंत्री हाड़ौती किसान यूनियन कोटा
सरकार में नहीं है निर्णय करने की क्षमता
प्रदेश सरकार अपनी इच्छा से निर्णय करने में असफल साबित हो गई है। मिल से खरीदी गई जमीन का निस्तारण नहीं करने से अब वहां जंगल बढ़ता जा रहा है। सरकार जयपुर विद्युत प्रसारण निगम की जमीन का तुरंत निस्तारण कर मिल की जमीन मिल को सौंप कर बंद मिल को चलाने का काम करें।
सर्वजीत सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी, केशवरायपाटन