
गोठड़ा. राज्य सरकार के हर घर कचरा संग्रहण अभियान की शुरू होने से पहले ही अभियान की सांसें फूल गई है, जिन फर्मों को पंचायत समिति द्वारा गांवों की सफाई कराने का जिम्मा सौंपा था। वे फर्में पंचायत से गायब हो गई है, जिसके चलते ग्राम पंचायत मुख्यालयों सहित प्रमुख राजस्व गांवों में जिधर देखो उधर गंदगी के ढ़ेर लगे हुए हैं, जिससे लोगों का जीना दुश्वार हो रहा है।
जानकारी अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर कचरा संग्रहण अभियान के लिए ग्राम पंचायतों में टेंडर प्रक्रिया नहीं देकर पंचायत समिति के माध्यम से पंचायतों में हर घर से कचरा संग्रहण के लिए टेंडर जारी किए, लेकिन इसमें दिलचस्प बात यह है कि जिन फर्मों को पंचायतों में सफाई का ठेका दिया है उन्हें कचरा संग्रहण का अनुभव तक नहीं था। ऐसे में गांवों की साफ सफाई भगवान भरोसे है। हिण्डोली पंचायत समिति की 41 ग्राम पंचायतों में हर घर कचरा संग्रहण अभियान के तहत करोड़ों रुपए का बजट आवंटित कर पंचायत समिति द्वारा दिसंबर 2024 अंत तक टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ग्राम पंचायत की फर्मों को टेंडर जारी किए गए। टेंडर जारी होने के बाद जिन फर्मों द्वारा पंचायतों में जाकर हर घर से कचरा संग्रहण करना था वे फर्में पंचायतों में पहुंची ही नहीं, जिसके चलते गांवों में गंदगी के ढ़ेर लगे हुए हैं। सफाई के नाम पर सिर्फ आंकड़ों में काम हुआ। हकीकत में सफाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि टेंडर मार्च में खत्म हो गए हैं। जिससे ठेकेदारों ने सफाई करने से हाथ खींच लिए हैं। अब सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
कचरा संग्रहण वाहन ही नहीं पहुंचा
जानकारी के अनुसार पंचायत समिति स्तर पर उपापन समिति बनी हुई है, जिसके द्वारा कचरा संग्रहण के लिए पंचायत समिति से फर्मों के चहेते लोगों ने अधिकारियों से सांठगांठ कर टेंडर जारी करवाए। ऐसी फर्मों को टेंडर दिए जिन्हें सफाई का अनुभव नहीं था। ग्रामीणों ने बताया कि कई ग्राम पंचायतों में आज तक कोई सफाईकर्मी या कचरा संग्रहण वाहन नहीं पहुंचा।
सरकार हर महीने लाखों रुपए का बजट दे रही है। फिर भी सफाई नहीं हो रही है। मार्च में इन फर्मों के टेंडर खत्म हो चुके हैं। ठेकेदारों ने फोटो खींचवा कर बजट उठाकर अपने हाथों की सफाई की है, जिसकी जांच करना तो दूर हर घर कचरा संग्रहण अभियान की मॉनिटरिंग तक नहीं हुई। कई पंचायतों में पूर्व में लगे सफाई कर्मी को ही थोड़ा भुगतान देकर ठेकेदारों ने इति श्री कर ली। जबकि टेंडर प्रक्रिया में स्पष्ट था कि प्रत्येक पंचायत पर कचरा संग्रहण वाहवन,कचरे को उठाने के लिए सफाई कर्मी आदि की व्यवस्था संबंधित फर्म को करनी थी। स्वच्छता एजेंसियों ने अधिकारियों से मिली भगत कर सरकार को लाखों रुपए की चपत लगा दी है।
पंचायतों में फर्जी सफाई फर्मों को पंचायत समिति द्वारा टेंडर जारी किए हैं, जिनका सफाई से कोई लेना-देना नहीं है। गांवों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। नालियां गंदगी से अटी पड़ी है। पंचायत समिति की साधारण सभा में मामला उठाएंगे। टेंडर प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
गायत्री शर्मा, पंचायत समिति सदस्य
पंचायत में सफाई नहीं होने से परेशानी बनी हुई है। दो बार पंचायत द्वारा संबंधित फर्म को नोटिस जारी किया है।
कैलाश कंवर, सरपंच ग्राम पंचायत मेण्डी।