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Bundi : अब रकबे के अनुसार मिलेगा खाद, फार्मर आईडी होगी जरूरी

किसानों को खाद की किल्लत से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार रवि सीजन से रकबे के अनुसार ही खाद उपलब्ध करवाएगी। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से पायलेट प्रोजेक्ट के बतौर राजसमन्द एवं सिरोही जिले में यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत किसान को फार्मरआईडी बनवाना आवश्यक माना गया है। संयुक्त निदेशक कृषि राजेश कुमार शर्मा ने बताया जिले के 60 हजार मैट्रिक टन यूरिया एवं 20 हजार मैट्रिक टन डीएपी खाद की मांग भेजी गई थी, जिसमें से 55 हजार मैट्रिक टन यूरिया एवं 16 हजार मैट्रिक टन डीएपी स्वीकृत किया गया है।
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Aug 04, 2026
Bundi : अब रकबे के अनुसार मिलेगा खाद, फार्मर आईडी होगी जरूरी
बूंदी. खेत को तैयार करते हुए। पत्रिका

बूंदी. किसानों को खाद की किल्लत से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार रवि सीजन से रकबे के अनुसार ही खाद उपलब्ध करवाएगी। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से पायलेट प्रोजेक्ट के बतौर राजसमन्द एवं सिरोही जिले में यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत किसान को फार्मरआईडी बनवाना आवश्यक माना गया है। संयुक्त निदेशक कृषि राजेश कुमार शर्मा ने बताया जिले के 60 हजार मैट्रिक टन यूरिया एवं 20 हजार मैट्रिक टन डीएपी खाद की मांग भेजी गई थी, जिसमें से 55 हजार मैट्रिक टन यूरिया एवं 16 हजार मैट्रिक टन डीएपी स्वीकृत किया गया है। इसमें से 34 हजार मैट्रिक टन से अधिक यूरिया एवं 8 हजार मैट्रिक टन से अधिक डीएपी मिल चुका है, जो विभिन्न सहकारी समितियां, डीलर एवं गोदाम में उपलब्ध है। जिले में कुल दो लाख 54 हजार हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जिसमें एक लाख हेक्टेयर में धान, 35 हजार में सोयाबीन, 30 हजार में मक्का,70-80 हजार में उड़द शेष बाजरा, अन्य फसलें, चारा एवं सब्जियों की जाती है।

यह है पायलेट प्रोजेक्ट

सरकारी अनुदान (सब्सिडी) वाले उर्वरकों के वितरण को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए एक नई नीति लागू की गई है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बाजार में खाद की कालाबाजारी, अवैध जमाखोरी और डीलरों द्वारा की जाने वाली जबरन टैगिंग (खाद के साथ अन्य सामान जबरन बेचना) पर पूरी तरह से लगाम लगाना है। कृषि आयुक्तालय द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब दुकानों से उर्वरक की खरीद के समय 'फार्मर आईडी' को मुख्य प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, जिन किसानों के पास फिलहाल यह आईडी मौजूद नहीं है, उन्हें खाद से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसे किसान अपनी जमीन की जमाबंदी, एफआरए पट्टा, बटाईनामा या किरायानामा जैसे वैकल्पिक कानूनी दस्तावेज दिखाकर भी आसानी से सब्सिडी वाला उर्वरक हासिल कर सकेंगे। इस बदलाव से बटाई पर खेती करने वाले, किराएदार किसानों और दिवंगत किसानों के कानूनी वारिसों को आ रही दिक्कतें पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।

बंद हो जाएगा अटैचमैंट

सरकार ने खाद कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि सब्सिडी वाले यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी की बिक्री के साथ किसी भी अन्य प्रोडक्ट की टैगिंग नहीं की जाएगी। यदि कोई भी विक्रेता इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ 'खाद नियंत्रण आदेश' के तहत सत दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सार्वजनिक करना होगा स्टॉक

नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी डीलर के गोदाम में स्टॉक उपलब्ध है, तो वह किसी भी सूरत में किसान को खाद देने से मना नहीं कर सकता। सभी दुकानदारों को अपने बिक्री केंद्र पर मूल्य सूची, उपलब्ध स्टॉक की मात्रा और गोदाम का पूरा विवरण स्पष्ट रूप से बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा।

रिकॉर्ड से होगा लिंक

कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार, इस नई डिजिटल प्रणाली के लागू होने से अब खाद की हर बिक्री सीधे किसान के रिकॉर्ड से लिंक हो जाएगी। इससे यह आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा कि किस व्यक्ति ने कितनी खाद खरीदी है और उसका उपयोग किस क्षेत्र में हो रहा है।

जिले में कहीं भी खाद की किल्लत नहीं है। पर्याप्त मात्रा में विभाग द्वारा यूरिया व डीएपी उपलब्ध करवाया जा रहा है। रवि सीजन से किसानों को रकबे के अनुसार ही खाद मिलेगा, जिससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी एवं अनावश्यक दोहन भी खत्म हो जाएगा।
राजेश शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि, विभाग, बूंदी

Updated on:
04 Aug 2026 06:08 pm
Published on:
04 Aug 2026 06:08 pm