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Iran-Israel War : ईरान-इजराइल युद्ध का राजस्थान पर बड़ा असर, बूंदी का बासमती चावल बंदरगाहों पर फंसा, व्यापारी-मजदूर परेशान

Iran-Israel War : राजस्थान पर ईरान-इजराइल युद्ध का बड़ा असर पड़ा रहा है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने बूंदी के चावल उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। 350 करोड़ रुपए कीमत का लगभग 3,75,000 क्विंटल बासमती चावल बंदरगाहों और गोदामों में फंसा हुआ है। जिस वजह से व्यापारी-मजदूर परेशान हैं।

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रामगंजबालाजी. चावल तैयार करने के बाद में गोदाम में स्टॉक करते हम्माल। फोटो पत्रिका

Iran-Israel War : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध का असर अब क्षेत्र के राजस्थान के चावल कारोबार पर पड़ा है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने बूंदी के चावल उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। लगभग 3,75,000 क्विंटल बासमती चावल, जिसकी कीमत 350 करोड़ रुपए से अधिक है, बंदरगाहों और गोदामों में फंसा हुआ है।

बूंदी-कोटा की लगभग 35 चावल फैक्ट्रियों में काम करने वाले लगभग 10,000 श्रमिकों पर बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है, जिनमें से 60 फीसदी बिहार से हैं। भंडारण स्थान की कमी के कारण मालिक उत्पादन बंद करने पर विचार कर रहे हैं।

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बूंदी राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज गोयल ने बताया कि बूंदी का बासमती चावल ईरान, इराक, यूएई, सूडान, तुर्की, जॉर्डन, अल्जीरिया, कुवैत और कुछ यूरोपीय देशों को निर्यात किया जाता है। उन्होंने कहा कि निर्यातकों को भी बकाया भुगतान नहीं मिल पा रहा है। केवल कुछ बड़े खरीदारों ने ही थोड़ी-बहुत रकम जारी की है।

80 फीसदी हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, इराक को होता है निर्यात

बूंदी जिले के लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष रमनदीप शर्मा ने बताया कि बूंदी और कोटा में प्रतिदिन कम से कम 25,000 क्विंटल चावल प्रसंस्कृत होता है, जिसका 80 फीसदी हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और इराक को निर्यात किया जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि युद्ध शुरू होने के समय चावल का बाजार भाव 80 रुपए प्रति किलो था और युद्ध के कारण लगभग 3,75,000 क्विंटल चावल का निर्यात रुक गया।

इंश्योरेंस कंपनियों ने भी किया किनारा

बंदरगाहों से खाड़ी देशों में चावल ले जाने वाले जहाजों का पहले बीमा कराया जाता था, ताकि माल सुरक्षित गंतव्य तक पहुंच सके। लेकिन युद्ध की स्थिति बनने के बाद बीमा कंपनियों ने मालवाहक जहाजों का बीमा करने से हाथ खड़े कर दिए है। इसके कारण कई जहाज गुजरात के बंदरगाहों पर खड़े हुए है और माल की ढुलाई ठप हो गई है।

राइस मिलों में तैयार होने वाला चावल एक्सपोर्टर खरीदकर विदेश भेजते थे, लेकिन वर्तमान हालात में एक्सपोर्टर भी खरीद से बच रहे हैं। ऐसे में मिल संचालकों और व्यापारियों को तैयार माल का स्टॉक रखना पड़ रहा है।

परिवहन शुल्क में 10 गुना से अधिक की वृद्धि

रमनदीप शर्मा ने कहा कि शिपिंग कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले परिवहन शुल्क में 10 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। शर्मा ने राज्य सरकार से क्षेत्र में काम करने वाले चावल मिल मालिकों और मजदूरों के लिए विशेष रियायतें प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार को युद्ध जैसी परिस्थितियों में प्रभावित उद्योगों के लिए एक पैकेज या विशेष पोर्टफोलियो तैयार करना चाहिए, जैसा कि कोविड-19 के दौरान किया गया था।

एक अन्य चावल मिल मालिक ने बताया कि बूंदी का चावल उद्योग लगभग 4,000 करोड़ रुपए के वार्षिक कारोबार पर फलता-फूलता है। बूंदी, कोटा और बारां में सालाना 15 लाख टन बासमती चावल का उत्पादन होता है।

चावल मिलों ने उत्पादन कम किया

चावल मिल के एक ठेकेदार ने बताया कि शहर की कुछ चावल मिलों ने उत्पादन कम कर दिया है और मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी भी मजदूर को काम बंद करने के लिए नहीं कहा गया है।

संचालकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही

चावल उद्योग संघ के सचिव गौरव जुवाल, सदस्य रमन शर्मा, आढ़तिया संघ सचिव सुनील श्रृंगी, अमित गर्ग, संदीप शर्मा और क्राति अग्रवाल ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद मंडी में करीब 25 प्रतिशत माल की आवक कम हो गई है। वहीं निर्यात भी प्रभावित हो रहा है, जिससे व्यापारियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। संचालकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।

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Published on:
16 Mar 2026 02:26 pm
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