भांग के बिना होली का रंग मानो फीका है पर यह होली के रंग में भंग डालने का काम कर सकती है।
बूंदी. भांग के बिना होली का रंग मानो फीका है पर यह होली के रंग में भंग डालने का काम कर सकती है। होली पर लोग अक्सर ठंडाई के रूप में भांग लेते हैं। बूंदी शहर में तो भांग किसी भी प्रकार में सेवन नुकसानदायक है। भांग खाने के बाद कई बार सिरदर्द, चक्कर आने, उल्टी जैसी दिक्कतें होती है।
हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. साकेत गोयल के अनुसार भांग से यूफोरिया, एंजाइटी से होने वाले बदलावों के चलते याददाश्त पर भांग लेने के बाद सामान्य असर से तीन गुना ज्यादा बढ़ जाता है। भांग का सेवन करने से हृदय गति, ब्लड प्रेशर में बदलाव के हृदय संबंधी बीमारी के गंभीर परिणाम सामने आते हैं।
इसकी लत भी लग सकती है
इसका क्रोनिक प्रभाव दिमाग पर पडऩे के साथ ही ड्रग की तरह लत भी लग सकती है। भांग का सेवन धूम्रपान की तरह ही होता है जो इसकी लत लगने की संभावना होती है। कम उम्र के लोगों में इसका असर वयस्कों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है।
अजीबो गरीब हरकत
भांग खाने के बाद कुछ लोग एक काम को लगातार करता रहता है। भाग खाने के बाद अधिक खाने की इच्छा होती है। भांग खाने के बाद गाड़ी चलाना सबसे अधिक खतरनाक है। पैदल चलना भी कम जोखिम भरा रहा है। भांग खाने के बाद कई बार व्यक्ति अपनी सुध खो देता है।
भांग के साइट इफेक्ट
भूख में कमी या अचानक से तेज भूख लगने की समस्या ,- नींद आने में दिक्कत और चिड़चिड़ापन हावी होना, कई बार बैचेनी के साथ तेज गुस्सा, घबराहट के साथ उल्टी ,- काम के दौरान भांग का सेवन करने से दिन में सपने देखने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या है भांग
भांग एक प्रकार का पौधा है जिसकी पत्तियों को पीस कर भांग तैयार की जाती है। उत्तर भारत में इसका प्रयोग नशे के लिए किया जाता है। भांग की खेती प्राचीन समय में पणि कहे जाने वाले लोगों द्वारा की जाती थी। पहाड़ी इलाकों में भांग काफी पाया जाता है। खाली पड़ी जमीन पर भांग के पौधे अपने आप पैदा हो जाते हैं। लेकिन उनके बीज खाने के उपयोग में नहीं आते हैं।
नमी वाली जगह भांग के लिए बहुत अनुकूल रहती है। होली के अवसर पर मिठाई और ठंडाई के साथ इसका प्रयोग करने की परंपरा है। भांग का इस्तेमाल लंबे समय से लोग दर्द निवारक के रूप में करते रहे हैं। कई देशों में इसे दवा के रूप में भी उपलब्ध कराया जाता है।