बूंदी

नियम बदले तो टूट गई अन्नदाता की आस,छलावा साबित हो रही सरकार की योजना

अब ऋण लेना किसानों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है, -रोजाना लगा रहे चक्कर

2 min read
Dec 29, 2017
member farmers get agricultural loans

बूंदी. अन्नदाताओं की आय बढ़ाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार ने कई योजनाएं चल रखी है, लेकिन हकीकत में योजनाओं का नहीं मिल पा रहा है। किसानों को शून्य फीसदी ब्याज दर पर ग्राम सेवा सहकारी समितियों की ओर से ऋण दिया जाता है, लेकिन अब ऋण लेना किसानों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है।

सरकार की ओर से निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी किसानों को ऋण के लिए आए दिन ग्राम सेवा सहकारी समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं । हिण्डोली एवं दबलाना क्षेत्र में संचालित 24 ग्राम सेवा सहकारी समितियां बनी हुई हैं। जिनमें लघु सीमांत एवं मझौले किसानों की संख्या अधिक है।

इन्हें ग्राम सेवा सहकारी समितियों की ओर से एक साल के लिए कृषि ऋण शून्य फीसदी ब्याज दर पर दिया जाता है, लेकिन पिछले एक साल से सैकड़ों नए किसान ऋण नहीं मिलने से परेशान हो रहे हैं।


अब यह कर दिया


लघु सीमांत किसानों को करीब एक लाख रुपए तक ऋण दिया जाता है। जिससे किसान अपनी कृषि जरूरतों को पूरा करते हैं। सहकारी समितियों को नाबार्ड द्वारा 60 प्रतिशत एवं बैंक द्वारा 40 प्रतिशत राशि दी जाती थी। जिससे सभी किसानों को ऋण सरलता से मिल जाता था, लेकिन साल 2014-15 में नाबार्ड ने नियम बदल दिए। इसके तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों के नए सदस्य किसानों को अब 40 प्रतिशत राशि नाबार्ड द्वारा एवं 60 प्रतिशत राशि बैंकों द्वारा देने का नियम बना दिया। अब बैंकों के पास इतनी अधिक राशि नहीं होने से नए किसानों को ऋण देने में परेशानी आ रही है।

कतार में 2800 किसान


हिण्डोली एवं दबलाना कॉपरेटिव सोसायटी के अधीन गोठड़ा, धोवड़ा, दबलाना, भवानीपुरा, धनावा, चेंता, बोरखण्डी, रानीपुरा, आकोदा, हिण्डोली, मांगली माताजी, थाना, पेच की बावड़ी, खीण्या, खेरखटा, बसोली, ओवन, बड़ानयागांव, गुढ़ा बांध, गुढ़ा गोकुलपुरा, टोंकड़ा, पगारां, बड़ौदिया सहित 24 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में करीब 2800 नए किसान सदस्यों ने ऋण के लिए आवेदन कर रखा है। ग्राम सेवा सहकारी समितियों की ओर से एमएलसी बनाकर मुख्यालय पर भेज रखी है, लेकिन अभी तक ऋण नहीं मिला।


-ग्राम सेवा सहकारी समिति धोवड़ा अध्यक्ष महेंद्र सिंह हाड़ा ने बताया की ग्राम सेवा सहकारी समिति में नए किसानों को ऋण नहीं मिलने से आए दिन वे समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। राज्य सरकार बैंक को अधिक अनुदान दे तो समस्या का समाधान हो सकता है।

हनुमान सैनी, जिला सचिव, सहकारी समिति संघ बूंदी ने बताया की नए किसानों को सहकारी समितियों से ऋण मिलना चाहिए। राज्य सरकार को बैंकों की अनुदान राशि बढ़ानी चाहिए।

मोहनलाल जाट, वरिष्ठ प्रबंधक दी बूंदी कॉपरेटिव सोसायटी बूंदी ने बताया की बैंक की ओर से राज्य सरकार को नए किसानों को ऋण उपलब्ध करवाने के लिए कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है। जितनी राशि मिलती है, उसी अनुसार ऋण उपलब्ध करवाया जाता है। करीब 2800 नए किसानों को ऋण नहीं दिया जा रहा है।

Published on:
29 Dec 2017 12:42 am