सरकार की एक घंटे की पाबंदी ने बूंदी जिले को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में हाड़ौती में सबसे पीछे कर दिया।
बूंदी. सरकार की एक घंटे की पाबंदी ने बूंदी जिले को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में हाड़ौती में सबसे पीछे कर दिया। योजना के तहत रोगी को अस्पताल में एक घंटे के भीतर भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के काउंटर पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसके बाद ही उसे योजना का लाभ दिया जाएगा। नियमों की इन पेचीदगियों को जिले का ग्रामीण तबका समझ नहीं पा रहा। ऐसे में जरूरतमंद रोगियों को सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। यही कारण है कि योजना का लाभ देने में हाड़ौती में बूंदी अति पिछड़े की श्रेणी में नजर आने लगा है।
योजना के तहत गरीब व जरूरतमंदों को नि:शुल्क उपचार देने की सुविधा जिला अस्पतालों सहित निजी अस्पतालों में सरकार ने की है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बूंदी जिला अस्पताल में प्रतिमाह मात्र २८० रोगियों को ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल रहा है। जबकि कोटा में लगभग ४०००, बारां में ३०००, झालावाड़ में ३०५० रोगियों को योजना का लाभ प्रतिमाह मिल रहा है। ऐसे में सरकार की योजना का लाभ देने में बूंदी अतिपिछड़े की श्रेणी में माना जा सकता है।
बना दिए जटिल नियम, कैसे मिले लाभ
सूत्रों के अनुसार सरकार ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत नियमों को काफी जटिल कर दिया है। इस कारण बड़ी संख्या में पात्रलोगों को सरकारी अस्पतालों में योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार आउटडोर समय में आईसीयू व जनरल वार्ड में डे-प्रोसीजर के तहत आने वाली रोगियों को एक घंटे के भीतर भामाशाह कार्ड व नम्बर बताना अनिवार्य है, यदि एक घंटे में नम्बर नहीं बताए तो योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
अन्य बीमारियों में जिस तारीख को रोगी भर्ती हुआ है, उसी तारीख को भामाशाह काउंटर पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा एमरजेंसी रोगी का बिना भामाशाह कार्ड के एक घंटे के भीतर रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। इसके बाद ७२ घंटे के भीतर भामाशाह कार्ड बताना होगा। तब ही जरूरतमंद को लाभ मिलेगा। जबकि पूर्व में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत ४८ घंटे तक रोगी कार्ड लाकर काउंटर पर दे सकता था। जिससे रोगी को लाभ मिलता था।
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना नोडल अधिकारी डॉ.के.सी. मीणा ने बताया की अस्पताल में आने वाले रोगी को पहले ४८ घंटे तक कार्ड लाने की सुविधा थी। अब एक घंटे के भीतर काउंटर पर रोगी को रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। समय निकलने के बाद रोगी को योजना का लाभ नहीं मिलता। कई रोगी कार्ड साथ लेकर नहीं आते, उन्हें नम्बर भी पता नहीं होते। इस कारण भी समस्या हो रही है।
वर्ष २०१५ को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू हुई थी। योजना का लाभ लेने को लेकर आज भी लोगों में जागरूकता की कमी है। कई रोगी कार्ड साथ लेकर नहीं आते, कार्ड के नम्बर भी नहीं बताते। बूंदी जिला अस्पताल प्रशासन भी जरूरतमंदों को लाभ देने में अनदेखी बरत रहा है। लेागों को सही तरीके से जानकारी नहीं दी जाती। ऐसे में योजना के प्रचार प्रसार में भी कमी नजर आ रही है।