
बूंदी .पर्यटन नगरी की ऐतिहासिक महत्व की जैतसागर झील के हाल अब ठीक नहीं रहे। धीरे-धीरे झील कचरा पात्र बनती जा रही है। जिम्मेदारों ने अब झील की ओर झांकना छोड़ दिया है। झील कमल जड़ों के साथ-साथ शहर के कचरे से अटने लगी है।
पानी धीरे-धीरे दूषित हो रहा है। जानकारों की माने तो यही हाल रहने पर झील दम तोड़ देगी। शहर के बाशिंदे इसे बड़ा तालाब भी कहते हैं। यह झील 4455 हैक्टेयर भूमि में फैली है। 1995 तक यह झील ताजा पानी का स्रोत थी। तब इस झील में लगे फव्वारे के चलने पर झील का झिलमिलाता पानी अत्यंत आकर्षक व मनोहारी लगता था।
अब यह सब यहां नहीं दिखता। बूंदी उत्तरी द्वार के बाहर स्थित है, जैतसागर झील। लगभग 3.5 किलोमीटर लम्बी है। इसके एक और टेरेस गार्डन स्थित है, तथा झील के किनारे सुखमहल बना है। पहाड़ों के मध्य झूला झूलती प्रतीत होती इस झील को बूंदी के राजा जैता मीणा ने बनवाया था जिसका जीर्णोद्धार राव राजा सुरजन सिंह की माता रानी जयवंती ने करवाया था।
इसके बाद इसका पुनरुद्धार राव राजा विष्णु सिंह के कारीगर सुखराम ने कराया और इसके निकट ग्रीष्म ऋतु में शाही परिवार के रहने के लिए सुखमहल विश्रामगाह भी बनवाया। रडियार्ड किपलिंग ने इसमें सन् 1886 में दो रात्रि विश्राम किया था। किपलिंग उन दिनों सिविल एंड मिलेट्री गजट में पत्रकार थे। अब झील के हाल ठीक नहीं रहे।