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Bundi News : एक दशक बाद फिर दिखेगी हाथों की मशक्कत, मतपत्रों पर हाथ से लिखने होंगे प्रत्याशियों के नाम

रात का सन्नाटा, हाथ में कलम और सामने मतपत्रों का ढेर। एक-एक मतपत्र पर प्रत्याशी का नाम लिखना, फिर उसकी जांच करना और मतपत्रों की गड्डियां तैयार करना। यह सिलसिला कुछ घंटों का नहीं, बल्कि हजारों मतपत्रों के लिए पूरी रात चल सकता है। पंचायती राज चुनाव में करीब एक दशक बाद मतदान कार्मिकों को एक बार फिर इसी तरह की मशक्कत से गुजरना पड़ सकता है।
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बूंदी

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Narendra Agarwal

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Updated: 30 Oct 2026, 12:25 PM IST

candidates' names will have to be written by hand on the ballot papers

बूंदी. बैलेट पेपर की तैयारी करते कार्मिक।

बूंदी. रात का सन्नाटा, हाथ में कलम और सामने मतपत्रों का ढेर। एक-एक मतपत्र पर प्रत्याशी का नाम लिखना, फिर उसकी जांच करना और मतपत्रों की गड्डियां तैयार करना। यह सिलसिला कुछ घंटों का नहीं, बल्कि हजारों मतपत्रों के लिए पूरी रात चल सकता है। पंचायती राज चुनाव में करीब एक दशक बाद मतदान कार्मिकों को एक बार फिर इसी तरह की मशक्कत से गुजरना पड़ सकता है। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान होने के कारण प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने की जिम्मेदारी मतदान दलों पर होगी। बूंदी जिले में तीसरे और चौथे चरण के तहत 5 और 16 नवंबर को सरपंच व वार्ड पंच के चुनाव होने हैं। इससे पहले 3 और 14 नवंबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव होंगे। ऐसे में मतदान कार्मिकों के सामने लगातार चुनावी ड्यूटी निभाने की चुनौती रहेगी। पहले चरण की प्रक्रिया पूरी करने, ईवीएम जमा कराने और दूसरी जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्हें पंच-सरपंच चुनाव की तैयारी में जुटना होगा। प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिह्न तय होने के बाद मतपत्रों पर नाम लिखने का काम शुरू होगा।

हर नाम के लिए हाथ चलेगा

जिले में पंच और सरपंच चुनाव के लिए कुल 17 लाख 91 हजार 720 मतपत्र छपवाए गए हैं। इनमें वार्ड पंच के लिए 8 लाख 29 हजार 440 गुलाबी और सरपंच पद के लिए 9 लाख 67 हजार 680 सफेद मतपत्र शामिल हैं। इन मतपत्रों पर चुनाव चिह्न पहले से छपे होंगे, जबकि प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने होंगे। एक मतपत्र पर नाम लिखने में औसतन 30 से 40 सेकंड लगते हैं तो लाखों मतपत्रों पर नाम लिखने की प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा नामों की शुद्धता जांचने, मतपत्रों को क्रमवार व्यवस्थित करने और उनकी गड्डियां बनाने में भी समय लगेगा। किसी नाम में गलती होने पर मतदान की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहेगी। इसलिए कर्मचारियों को तेजी के साथ पूरी सावधानी भी बरतनी होगी।

दो-तीन रातें जागकर करना पड़ सकता है काम

जिले की 235 ग्राम पंचायतों के 2201 गांवों में चुनाव होने हैं। करीब 7 लाख 16 हजार 102 मतदाता गांव की सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे। चुनावी तैयारियों में करीब पांच हजार कार्मिकों की ड्यूटी लगाई जानी है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने केवल मतदान करवाने की ही नहीं, बल्कि उससे पहले मतपत्र तैयार करने की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। बड़ी ग्राम पंचायतों में मतदाताओं की संख्या अधिक होने से मतपत्रों की व्यवस्था में अतिरिक्त समय लग सकता है। कार्मिकों को प्रत्याशियों के नाम लिखने, उनकी जांच करने और मतदान सामग्री व्यवस्थित करने में देर रात तक काम करना पड़ सकता है। इसके बाद सुबह सात बजे से मतदान शुरू करवाना और शाम को मतगणना कर परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

तालेड़ा में वार्ड ज्यादा, नैनवां में मतदाता अधिक

जिले में ग्राम पंचायतों और वार्डों की संख्या के साथ मतदाताओं का दबाव भी अलग-अलग है। नैनवां पंचायत समिति क्षेत्र की 39 ग्राम पंचायतों में 385 वार्ड हैं, जहां 1 लाख 29 हजार 281 मतदाता हैं। वहीं तालेड़ा की 40 ग्राम पंचायतों में 402 वार्ड हैं और यहां 1 लाख 22 हजार 402 मतदाता हैं। जिले की 235 ग्राम पंचायतों में करीब 796 मतदान बूथों पर चुनाव कराने की तैयारी है। प्रत्येक बूथ पर पांच कार्मिक लगाए जाने हैं। परिसीमन के बाद अधिकांश बूथों पर 800 से 1200 मतदाता होने से मतदान व्यवस्था संभालने में मदद मिल सकती है, लेकिन बड़ी पंचायतों में प्रत्याशियों की संख्या और मतपत्रों की तैयारी का काम चुनौतीपूर्ण रहेगा।

शिक्षक संगठनों की मांग, प्रक्रिया हो सरल

मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने की प्रक्रिया को लेकर शिक्षक संगठन इसे सरल बनाने की मांग उठा रहे हैं। उनका मानना है कि जब लाखों मतपत्र तैयार करने हों तो नाम लिखने और उनकी जांच में बड़ी संख्या में कर्मचारियों का समय खर्च होगा। ऐसे में मतदान से पहले पर्याप्त समय और व्यवस्थित कार्ययोजना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव न पड़े और मतदान प्रक्रिया में किसी तरह की त्रुटि की आशंका कम हो।

नाम से लेकर गड्डी बनाने तक जिम्मेदारी

निर्वाचन प्रक्रिया के तहत वार्ड पंच और सरपंच के लिए अलग-अलग रंग के मतपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इन पर चुनाव चिह्न के सामने संबंधित प्रत्याशी का नाम हाथ से लिखा जाएगा। इसके बाद मतपत्रों की जांच होगी और उन्हें मतदान के लिए व्यवस्थित किया जाएगा। नोटा सहित सभी निर्धारित विकल्पों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।

पंच और सरपंच चुनाव के लिए जिले में करीब 17 लाख 91 हजार 720 मतपत्र छपवाए गए हैं। चुनाव तीसरे और चौथे चरण में होने हैं। इसकी तैयारियां जारी हैं और कर्मचारी इस कार्य में जुटे हुए हैं।
चित्रा ङ्क्षसह, मतपत्र एवं लेखा प्रभारी, बूंदी