
बूंदी. जिले में आवारा कुत्तों का आतंक अब आमजन के गंभीर संकट बन चुका है। तीन वर्षों में तीन मासूमों की मौत और साढ़े चार हजार लोगों पर हमले के बावजूद जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी नसबंदी, धरपकड़ और पुनर्वास की योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 से जुलाई 2026 तक जिले में 4,033 डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे अधिक बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। सबसे ताजा मामला गत 20 जुलाई का है।
सदर थाना क्षेत्र के बीशनपुरा गांव में चार वर्षीय श्रेया खेत की ओर जा रही थी, तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल श्रेया की कोटा में उपचार के दौरान मौत हो गई। उसी दिन गांव की कैलाश बाई और ब्रह्मा गुर्जर भी कुत्तों के हमले में घायल हो गई। इससे पहले 4 मई को तालेड़ा थाना क्षेत्र के अलकोदिया गांव में सुबह शौच के लिए निकली नौ वर्षीय छात्रा ङ्क्षरकू पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल ङ्क्षरकू की मौत हो गई। वहीं 10 जुलाई 2023 को तिखाबाड़ा गांव में खेत पर जाते समय 12 वर्षीय मांगीलाल पर तीन कुत्तों ने हमला कर दिया था। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी भी जान नहीं बच सकी। तीनों घटनाओं के बाद जिम्मेदारों ने कार्रवाई के दावे तो किए, लेकिन हालात नहीं बदले।
जिले में वर्ष 2024 में 1,524, वर्ष 2025 में 1,620 और वर्ष 2026 में जुलाई तक 884 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं। यानी ढाई साल में 4,033 लोग डॉग बाइट का शिकार बने। 20वीं पशुगणना के अनुसार जिले में 8,544 कुत्ते हैं। अस्पतालों में प्रतिदिन 20 से 25 लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं, लेकिन आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए न तो व्यापक नसबंदी अभियान चल रहा है और न ही प्रभावी धरपकड़ हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार भूख, रेबीज संक्रमण, झुंड में रहने की प्रवृत्ति, बच्चों की तेज आवाज या अचानक हरकत, अपने क्षेत्र की सुरक्षा की भावना और इंसानों के दुव्र्यवहार के कारण कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे में छोटे बच्चे सबसे आसान शिकार बनते हैं।
धनातरी में 50 लाख रुपए की स्वीकृति मिलने के बावजूद लंबे समय तक शेल्टर होम का निर्माण शुरू नहीं हो सका। अब जाकर टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई है और वर्क ऑर्डर जारी होने की तैयारी है। दूसरी ओर पशुपालन विभाग का कहना है कि रेबीज के टीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। यदि स्थानीय निकाय कुत्तों को पकडक़र रखने की व्यवस्था करें तो विभाग नसबंदी (बर्थ कंट्रोल सर्जरी) भी कराने को तैयार है।
तीन मासूमों की मौत, चार हजार से अधिक हमले और हर दिन बढ़ते खतरे के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सिस्टम अब किस अगली त्रासदी का इंतजार कर रहा है?
धनातरी में बनने वाले शेल्टर होम का टेंडर हो चुका है। वर्क ऑर्डर जारी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
बृजेश रॉय, आयुक्त, नगर परिषद, बूंदी
रेबीज टीकाकरण के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है। जिले में पर्याप्त मात्रा में टीके उपलब्ध हैं। यदि ग्राम पंचायत, नगर पालिका या नगर परिषद कुत्तों को पकडक़र रखने की व्यवस्था करती है तो विभाग उनकी नसबंदी (बर्थ कंट्रोल सर्जरी) भी कराने को तैयार है। इससे आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित की जा सकती है।
डॉ. नीलकमल सक्सेना, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, बूंदी