बूंदी

खुशबू के बालपन को सौंख लिया जातीय पंचायत ने… तुगलकी फरमान, टिटहरी का अंडा फूटा तो दस दिस घर नही घुसेगी बालिका

मासूम ने नौ दिन तक झेला अंधविश्वास का दंश
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Updated: 12 Jul 2018, 2:02 PM IST
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खुशबू के बालपन को सौंख लिया जातीय पंचायत ने... तुगलकी फरमान, टिटहरी का अंडा फूटा तो दस दिस घर नही घुसेगी बालिका

बूंदी/बसोली. विज्ञान के इस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अंधविश्वास हावी है। अंधविश्वास के चलते एक छह वर्षीय मासूम बालिका को नौ दिन तक सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ा। यह मामला है हिंडोली उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सथूर में स्थित हरिपुरा गांव का।


हरिपुरा निवासी हुकमचंद रैगर ने बताया कि दो जुलाई को उसकी छह वर्षीय पुत्री खुशबू अपनी माता के साथ विद्यालय में नामांकन के लिए गई थी। वहां पर दूध पिलाने के लिए बालिकाओं की लाइन लग रही थी। इसी दौरान अचानक खुशबू का पैर टिटहरी के अंडे पर पड़ गया, जिससे अंडा फूट गया।

जिसकी जानकारी वहां मौजूद अन्य ग्रामीण महिलाओं को मिली तो उन्होंने गांव में जाकर ग्रामीणों को पूरे घटनाक्रम से अवगत करवा दिया। इसके बाद गांव में तुरन्त पंच-पटेलों ने बैठक बुलाई और मासूम बालिका को समाज से बहिष्कृत करने का फरमान सुना दिया।

बालिका के घर के अंदर प्रवेश करने पर रोक लगा दी। बालिका को खाना एवं पीने के पानी के लिए भी अलग से बर्तन दिए गए। पंच-पटेलों के फरमान के चलते पिता पिछले नौ दिन से अपने पुत्री को लेकर घर के बाहर बने बाड़े में रह रहा था। पिता का कहना है कि इस दौरान पंच-पटेलों ने शराब की बोतल व चने भी मंगवाए थे।

बूंदी की बालचंदपाड़ा गोशाला में कार्य करने वाले हुकमचंद ने इसकी जानकारी गोशाला संचालक नितेश गांधी को दी तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस व प्रशासन को दी। इसके बाद बुधवार को पुलिस व प्रशासन हरकत में आया।

बुधवार को तहसीलदार भावना सिंह व थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी लेकर के पंच पटेलों को एकत्रित किया। बालिका को घर के अंदर प्रवेश करवाया गया एवं पंच पटेलों को इस तरह के फैसले नहीं करने के लिए पाबंद किया।


अधिकारियों के सामने ऐसे कराया प्रवेश


अधिकारियों की मौजूदगी में ग्र्रामीणों व परिजनों ने मासूम बालिका को नौ दिन बाद रीति रिवाज से घर के अंदर प्रवेश करवाया। इससे पहले गांव में चने बांटे गए एवं परिवार के जंवाई को टावल भेंट किया। उसके बाद बालिका को घर के अंदर प्रवेश दिया गया।


-समाज के लोगों ने कानून की जानकारी नहीं होने के अभाव में इस तरह का कदम उठा लिया था। मौके पर पहुंच कर उनसे समझाइश करने पर उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया और बालिका को घर के अंदर प्रवेश करवा दिया। अब कभी इस तरह के फैसले नहीं करने के लिए उन्हें पाबंद भी किया गया।

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