बूंदी

मानसून आपदा प्रबंधन के 300 पदों पर आए 5200 आवेदन, B.Tech-B.Ed-M.Sc.डिग्रीधारियों ने भी भरा अस्थायी नौकरी का फॉर्म

Jobs 2026: बूंदी जिले में बढ़ती बेरोजगारी की तस्वीर अब अस्थायी नौकरियों में भी साफ नजर आने लगी है। मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन में सहायता के लिए निकाले गए 300 अस्थायी पदों पर 5200 से ज्यादा युवाओं ने आवेदन कर दिए हैं।

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May 25, 2026
मॉकडि्रल के दौरान आपदा राहत का कार्य करते हुए सिविल डिफेंस के जवानों का फाइल फोटो: पत्रिका

Disaster Management Recruitment 2026: बूंदी जिले में बेरोजगारी चरम पर है। उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को भी रोजगार व सरकारी सेवा में अवसर नहीं मिलने पर अब अस्थायी नौकरियों में अवसर तलाशे जा रहे है। जिले में मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन में सहायता के लिए तीन सौ पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे, जिसमें 5200 युवाओं ने आवेदन जमा करवा दिए है। इन आवेदन कर्ताओं में वह युवा भी शामिल है, जिन्होंने अच्छे संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त कर रखी है, लेकिन जॉब नहीं मिलने से अब सिविल डिफेंस के लिए भी कतार में है।

जानकारी अनुसार जिले में मानसून सत्र 15 जून से 30 सितम्बर तक माना गया है। इस दौरान आपदा की स्थिति होने पर सिविल डिफेंस के जवानों को मौके पर आपात स्थिति से निपटने के लिए भेजा जाता है। तीन सौ पदों के लिए मांगे गए आवेदन में युवाओं को मूल निवास, आधार कार्ड, फोटो, कक्षा दस के अलावा अंतिम शिक्षा की अंक तालिका आदि जमा करवाई गई है। कलक्ट्रेट के आपदा विभाग में जमा आवेदनों में बीटेक, बीएड एवं एमएससी एवं इसके समकक्ष डिग्रीधारी युवाओं ने भी आवेदन किया है।

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छह सदस्यीय कमेटी करती है चयन

सिविल डिफेंस के लिए जमा हुए आवेदन में से चयन के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जिसमें जिला कलक्टर, अतिरिक्त जिला कलक्टर, जिला कोषाधिकारी, फायर ऑफिसर एवं जिला खेल अधिकारी सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद युवाओं का फिजिकल टेस्ट लिया जाता है। इसके बाद मेडिकल जांच और पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने पर ही नियुक्ति दी जाती है। चयनित युवाओं को प्रतिदिन आठ घंटे कार्य करने पर 822 रुपए का भुगतान किया जाता है। वहीं किसी प्रकार की आपदा या आपात स्थिति के दौरान कई बार अतिरिक्त समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है, लेकिन इसके लिए अलग से अतिरिक्त भुगतान का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।

आपदा प्रबंधन

बाढ़, भूकंप, आग लगने जैसी प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाओं में राहत और बचाव कार्य करना। नागरिकों को प्रशिक्षण।

आपात स्थिति: हवाई हमले या युद्ध से निपटने के लिए लोगों को प्राथमिक चिकित्सा, अग्निशमन और बचाव का प्रशिक्षण देना।

कानून व्यवस्था: भीड़ नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मदद करना।

जागरूकता: आपातकालीन सायरन, ब्लैकआउट व्यवस्था और सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए जनता को जागरूक करना।

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Published on:
25 May 2026 10:53 am
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