केंद्र सरकार ने राजकीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं में बदलाव करते हुए स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) को और मजबूत करने का निर्णय किया है। अब एसएमसी को विशेष अधिकार दिए गए हैं, जिससे विकास योजना तय करने में उनकी भूमिका अधिक महत्त्वपूर्ण होगी। विद्यालय प्रबंध समिति इस साल आगामी तीन वर्षों की विद्यालय विकास योजना बनाएगी, जिसकी वार्षिक समीक्षा की जाएगी।
बूंदी. अब केंद्र सरकार ने राजकीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं में बदलाव कर स्कूल प्रबंधन समिति को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। यानि उन्हे विशेष अधिकार देने तथा विकास योजना तय करने में भूमिका और महत्वपूर्ण कर दी है। अब विद्यालय प्रबंध समिति आगामी तीन वर्षों की विद्यालय विकास समिति की योजना इसी साल बनाएगी,जबकि इसकी हर वर्ष समीक्षा की जाएगी। साथ ही एसएमसी को विद्यालयों में 30 लाख रुपए तक के निर्माण कार्य करवाने की सीधी वित्तीय शक्ति भी दी जाएगी। नए दिशा-निर्देशों में सामाजिक ऑडिट अनिवार्य किया गया है। भुगतान अध्यक्ष और सचिव के आय-व्यय का विवरण नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना होगा।
पहले इसमें पोषाहार वितरण व राज्य सरकार से प्राप्त राशि का समुचित उपयोग का जिम्मा था। 5 लाख से अधिक की राशि के टेंडर समसा या पीडब्ल्यूडी के माध्यम से होते हैं। अब 30 लाख तक की राशि खर्च करने का अधिकार दिया गया है। केंद्र सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, विद्यालयों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित करने और सामुदायिक सहभागिता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से इस संंबंध में आदेश मिलने के बाद जल्द इसकी पालना सुनिश्चित कराई जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार एसएमसी में 75 प्रतिशत सदस्य अभिभावक होंगे, जिनमें 50 प्रतिशत माताओं की भागीदारी अनिवार्य है। शेष 25 प्रतिशत सदस्य शिक्षक, जनप्रतिनिधि, पूर्व छात्र और शिक्षाविद होंगे। समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा और हर माह बैठक अनिवार्य होगी। नई समिति के गठन की प्रक्रिया समिति के कार्यकाल समाप्त होने से पहले शुरू करना होगा।
सदस्यों की संख्या विद्यार्थियों पर आधारित होगी। ऐसे में 100 तक विद्यार्थियों वाले विद्यालय में 12 से 15 सदस्य, 100 से 500 पर 15 से 20 सदस्य और 500 से अधिक पर 20 से 25 सदस्य होंगे। अध्यक्ष अभिभावक होगा,जबकि सचिव संस्था प्रधान होगा। इसमें बदलाव यह है कि अब विद्यालयों में निर्माण कार्य के लिए पीडब्ल्यूडी की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। एसएमसी स्वयं 30 लाख तक के कार्य करा सकेगी। इससे विद्यालय केवल सरकारी संस्थान नहीं, बल्कि सामुदायिक संपत्ति के रूप में विकसित होंगे।
माता-पिता अभिभावक ( निर्वाचित सदस्य) - अध्यक्ष व उपाध्यक्ष
विद्यालय में पढऩे वाले विद्यार्थियों के माता-पिता - सदस्य
स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचित सदस्य - सदस्य
विद्यालय के शिक्षक - सदस्य
स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञ विषय विशेषज्ञ, शैक्षणिक विशेषज्ञ, विद्यालय के विद्यार्थी एवं पूर्व विद्यार्थी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, एएनएम - सदस्य ।
प्राचार्य व प्रधानाचार्य सदस्य-सचिव ।
यदि अभिभावक या सरंक्षक सदस्य के बच्चे ने विद्यालय छोड़ दिया।
किसी सदस्य का किसी आपराधिक आरोप या अन्य कारण से दोष सिद्धि व सजा होना।
सदस्य का ब्लॉक व जिले से प्रवासन।
यदि कोई सदस्य लगातार चार बैठकों में बिना सूचना अनुपस्थित रहता है।
यह व्यवस्था पहले से ही है,हालांकि इसमें कुछ संशोधन किया गया है। पहले इसमें पोषाहार वितरण व राज्य सरकार से प्राप्त राशि का समुचित उपयोग का जिम्मा था। 5 लाख से अधिक की राशि के टेंडर समसा या पीडब्ल्यूडी के माध्यम से होते हैं। अब 30 लाख तक की राशि खर्च करने का अधिकार दिया गया है। इससे एसएमसी अधिक जिम्मेदारी के साथ काम कर सकेगी। राज्य सरकार से आदेश मिलते ही संस्था प्रधानों को आदेशित कर इसकी पालना सुनिश्चित कराई जाएगी।
प्रहलाद शर्मा,अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (मा.),बूंदी