ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले विकास अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारियों [वीडीओ] पर आने वाले समय में काम का बोझ और बढऩे वाला है। जिले में नई ग्राम पंचायतों के गठन के बाद प्रशासन के सामने उनके कामकाज के संचालन के लिए चुनौती पैदा हो गई है।
बूंदी. ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले विकास अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारियों [वीडीओ] पर आने वाले समय में काम का बोझ और बढऩे वाला है। जिले में नई ग्राम पंचायतों के गठन के बाद प्रशासन के सामने उनके कामकाज के संचालन के लिए चुनौती पैदा हो गई है। हाल ही जिले में 60 नई ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन हुआ है। पंचायतीराज का पूरा संचालन विकास अधिकारी और वीडीओ के भरोसे चलता है, जबकि जिले में पहले से ही 28 ग्राम विकास अधिकारियों के पद रिक्त हैं। अब 60 नई पंचायतों के लिए इतने ही नए वीडीओ और स्टाफ की आवश्यकता होगी। ऐसे में कुल 88 पदों की कमी ने प्रशासन के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। चुनाव नजदीक होने के कारण नई भर्तियां फिलहाल असंभव मानी जा रही हैं। ऐसे में आगामी समय में इन पंचायतों का संचालन अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे ही करना पड़ेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति विकट जरूर है, लेकिन समाधान किया जाएगा।
242 हो जाएंगी पंचायतें
पुनर्गठन से पहले जिले में 182 ग्राम पंचायतें थीं। जो अब 60 नई पंचायतों के गठन के बाद बढक़र 242 हो जाएंगी। पंचायत समितियों की संख्या अब पांच से बढक़र आठ हो गई है वीडीओ के साथ ही जिले की पांच पंचायत समितियों में से बूंदी और ङ्क्षहडोली में विकास अधिकारी के पद भी रिक्त चल रहे हैं।
अनुपयोगी भवनों पर नजर, 30 करोड़ की दरकार
नई ग्राम पंचायतों के गठन के साथ पंचायत भवनों की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बन गई है। पंचायत राज विभाग अनुपयोगी सरकारी भवनों की तलाश में जुट गया है। कई स्थानों पर पुराने भवनों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन अनेक क्षेत्रों में उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रशासन को राजस्व भूमि या अनुपयोगी सरकारी भवनों की पहचान करनी होगी। एक पंचायत भवन के निर्माण पर औसतन 50 लाख रुपए खर्च का अनुमान है। 60 नए भवनों के निर्माण के लिए करीब 30 करोड़ रुपए की आवश्यकता पड़ेगी।
ये है बड़ी समस्या
स्टाफ की भारी कमी
ग्राम विकास अधिकारी
विकास अधिकारी
एलडीसी
कंप्यूटर ऑपरेटर
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
नई ग्राम पंचायतों के गठन के साथ ही भवनों की तलाश शुरू कर दी गई है। अनुपयोगी सरकारी भवनों को भी देखा जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुरूआत में अतिरिक्त कार्यभार देकर व्यवस्था संचालित की जाएगी। पहली बैठक के बाद धीरे-धीरे व्यवस्था सुचारू होगी। जिले में अब ग्राम पंचायतों की संख्या बढकर 242 हो गई है।
रवि वर्मा, सीईओ जिला परिषद बूंदी