बूंदी. पुलिस अधीक्षक कार्यालय में निजी सहायक ग्यारसीलाल बेखौफ था। कोटा एसीबी टीम ने कार्रवाई के दौरान उसे तत्काल
बूंदी. पुलिस अधीक्षक कार्यालय में निजी सहायक ग्यारसीलाल बेखौफ था। कोटा एसीबी टीम ने कार्रवाई के दौरान उसे तत्काल निजी सहायक की कुर्सी से उठने के लिए कहा, लेकिन देर तक कुर्सी छोडऩे को राजी नहीं हुआ। इसके बाद टीम ने रिश्वतखोर निजी सहायक को एक कुर्सी पर बैठा दिया। एसीबी की कार्रवाई के बाद भी ग्यारसीलाल के चेहरे पर सिकन दिखाई नहीं पड़ी। वह कार्रवाई कर रही एसीबी टीम के सदस्यों से कहता रहा कि ‘सा’ब रफा-दफा करो मामला। पूरा वैसा का वैसा ही कार्रवाई में शामिल मत करो। थोड़ा तो इधर-उधर करो। आप भी क्या कर रहे हो।’ इस पर एसीबी टीम के अधिकारियों ने उसे कई बार टोका।
अनुसंधान अधिकारी की भूमिका संदिग्ध
एसीबी टीम इस मामले में कोतवाली थाने के उपनिरीक्षक की भूमिका को भी संदिग्ध मान रही है। गबन के मामले की जांच कर रहे अनुसंधान अधिकारी उपनिरीक्षक तेज सिंह की भूमिका की एसीबी ने जांच शुरू की है। एसीबी के सूत्रों ने बताया कि फरियादी जैन से पहले भी कोतवाली थाना पुलिस ने राजीनामे की एवज में एक लाख रुपए की मांग रखी बताई।
कार्यालय में लंबे समय से
मई 2017 से पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कांस्टेबल ग्यारसी लाल को निजी सहायक के पद पर काम दिया हुआ है। इससे पहले ग्यारसीलाल निजी सहायक के असिस्टेंट के रूप में काम कर रहा था। ऐसे में उक्त कांस्टेबल लंबे समय से पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जमा हुआ है।
कार्रवाई में यह टीम शामिल
कोटा एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ठाकुरचंद्र शील के निर्देशन में पुलिस निरीक्षक अजीत बगडोलिया, कांस्टेबल मनोज शर्मा, असलम खान, खालिक मोहम्मद, भरत सिंह, दिलीप सिंह व नरेंद्र सिंह शामिल थे।
किसके लिए ले रहा था राशि
पुलिस अधीक्षक का निजी सहायक रिश्वत की राशि किसके लिए ले रहा था? यह सवाल कार्रवाई के बाद सभी के मन में रहा। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में इस प्रकार बेखौफ अपने ही महकमे के रिटायर्ड कर्मचारी से पैसे लेने के मामले ने जिले में पुलिस की कार्य प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।