बुरहानपुर

MP में ‘सूर्य पुत्री’ ताप्ती प्रदूषित! महाराष्ट्र-गुजरात से आ रहे साफ पानी में मिल रहा सीवर

MP News: ताप्ती जिसे महाराष्ट्र-गुजरात सम्मान से सींचते हैं, वही एमपी के ये शहर उसे सीवर में बदल रहा है। हालत ये हो चुके है कि ताप्ती में भक्त भी स्नान से कतरा रहे हैं।

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tapti river water pollution in burhanpur (Patrika.com)

Tapti River Water Pollution: प्रदेशभर की जीवनदायनी मां ताप्ती नदी महाराष्ट्र और गुजरात को समृद्ध बना रही है, लेकिन बुरहानपुर में हम ही इसे दूषित कर रहे हैं। सच ये है कि शहर से निकलने वाला सीवेज का पानी सीधे ताप्ती में मिल रहा है। ताप्ती को बचाने के लिए शहर में 90 करोड़ रुपए की सीवेज योजना पर काम भी हुआ, लेकिन अब भी बिना ट्रीट के पानी अब भी इसी में छोड़ा जा रहा है।

कारण बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट को क्षमता अनुसार पानी ही नहीं मिल रहा, अब दूसरे चरण में अन्य वार्डों को कवर कर इस योजना में पूर्ण रूप से काम करने की बात कही जा रही है, लेकिन यह अब तक केवल कागजों तक सीमित है। (MP News)

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परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु देख रहा नदी की दुर्दशा

प्रतिवर्ष मुलताई से ताप्ती की परिक्रमा यात्रा करने वाले भी बुरहानपुर में ताप्ती की दशा देख सिहर उठते हैं। उनका भी मानना है कि ताप्ती का एक पाट कुल साढ़े 900 किमी का है और केवल बुरहानपुर में ही सीवेज का पानी मिल रहा है। जबकि ताप्ती महाराष्ट्र को समृद्ध बना रही और गुजरात भी ताप्ती का पानी पी रहा, लेकिन बुरहानपुर में ही ताप्ती को मां का दर्जा देने वाले भक्त भी यहां स्नान से कतराने लगे हैं।

दूसरे चरण की योजना का भी काम बाकी

दरअसल नगर निगम की अमृत 2.0 योजना के तहत सीवेज योजना को स्वीकृति मिल गई है। शासन ने 110.52 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की है। शहर के ताप्ती नदी में मिलने वाले 19 नालों के पानी का उपचार इसमें होना है। जिससे ताप्ती नदी दूषित नहीं होगी। यह कार्य अमृत 1.0 में स्वीकृत सीवेज के कार्य के साथ ही किया जाना था लेकिन ये हो नहीं सका। जिसके कारण नदी का प्रदूषण जारी है। अब दूसरे चरण में काम पूरा कर ताप्ती को पूरी तरह शुद्ध करने का दावा किया गया है।
राजघाट पर सीवेज का पानी सीधे ताप्ती में मिलते हुए।

शहर के बाहर बसाड़ डैम से पानी सप्लाय

हाल ही में शहर में जलावर्धन योजना संचालित हो रही है। गनीमत है कि पानी एकत्रित करने के लिए शहर के बाहर बसाड़ में डैम बनाया है, जहां पानी ट्रीट कर सप्लाय किया जा रहा है। लेकिन बीच शहर में ताप्ती की दशा ठीक नहीं है। क्योंकि खेतों में इससे सिंचाई हो रही है, गंभीर बात यह भी है कि कई फैक्ट्रियों का दूषित जल भी ताप्ती में ही छोड़ा जा रहा है।

पहले फेस में 21 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट बनाया है. अभी 11 एमएलडी पानी ट्रीट हो रहा है। दूसरे फेस की योजना में परकोटे के बाहर के हिस्से को सीवेज से जोड़ देंगे। इससे पूरा 21 एमएलडी पानी ट्रीट होगा। इससे शहर के पूरे 19 नालों का पानी ट्रीट होकर खेतो के निर्माण के लिए देंगे। सीवेज का पानी ताप्ती में भी जाने से बच जाएगा।- धनराज महाजन, स्वास्थ्य विभाग चेयरमैन

पूरी तरह शुद्ध हो ताप्ती नदी

ताप्ती सेवा समिति के राजेश भगत ने कहा कि ताप्ती नदी पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए। भूतकाल इस पर निर्भर रहा है वर्तमान और भविष्य भी इसी पर टिका है। समाजसेवी महेंद्र जैन ने कहा कि ताप्ती नदी की महिमा से लोग परिचित है। इसकी गौरवगाथा और इतिहास के बारे में भी जानते हैं। ताप्ती सृष्टि की प्रथम नदी और आदि गंगा है। (MP News)

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Updated on:
03 Nov 2025 01:51 pm
Published on:
03 Nov 2025 12:00 pm
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