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अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच अमिताभ कांत ने भारत के लिए जताई चिंता, तेल संकट पर कही यह बात

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण भारत के तेल आयात और तेल रिजर्व पर असर पड़ सकता है। इस बात को लेकर नीति आयोग के पूर्व चीफ अमिताभ कांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स टिप्पणी की है।
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Mar 05, 2026
India crude oil reserves,
कच्चा तेल (Image: Freepik)

अमेरिका-ईरान के बढ़ते संघर्ष के बीच अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय प्रकट की है। इसी बीच नीति आयोग के पूर्व चीफ अमिताभ कांत ने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट की। इस पोस्ट में उन्होंने भारत के लिए गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को बंद करने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।

पोस्ट में अमिताभ कांत ने लिखा कि कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि का मतलब है भारत के वार्षिक फ्यूल इम्पोर्ट बिल में 13 से 14 अरब डॉलर का इजाफा। इसके साथ ही चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और रुपए पर दबाव पड़ सकता है। भू-राजनीति में चल रही घटनाएं हमारी ऊर्जा सुरक्षा की परीक्षा लेती रहेंगी।

तेल की कीमतों के मौजूदा हालात

तेल की कीमतों में गुरुवार को 3% से अधिक की वृद्धि हुई। ईरानी सेना ने होर्मूज जलडमरूमध्य के आस पास तेल टैंकरों पर हमला कर तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न की है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 2.65 डॉलर यानी 3.26% बढ़कर 83.99 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं, अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल भी 2.76 डॉलर यानी 3.70% बढ़कर 77.42 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

भारत के लिए क्या है समाधान

अमिताभ कांत के अनुसार, भारत को बढ़ती तेल की कीमतों से निपटने के लिए अपनी घरेलू आपूर्ति ऊर्जा पर निर्भर रहना होगा। क्लीन एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर क्लीन एनर्जी को उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इसके लिए उच्च-पीएलएफ सौर-पवन हाइब्रिड परियोजनाएं, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग, आधुनिक ग्रिड, बड़े पैमाने पर बैटरी और पंपेड हाइड्रो स्टोरेज और परमाणु ऊर्जा जैसे कम कार्बन वाले आधारभूत ऊर्जा स्रोतों की जरूरत होगी।

कितना भंड़ार है भारत के पास

गुरुवार को वायदा करोबार में कच्चे तेल की कीमतें 185 रुपये बढ़कर 7,055 रुपये प्रति बैरल हो गईं। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के पास 6 से 8 हफ्तों तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन है। भारत के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से लाया जाता है, जो प्रमुख ऊर्जा चोकपॉइंट है जिसे ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ अपने संघर्ष के बीच अवरुद्ध कर दिया है। बढ़ते तनाव के कारण भारत वैकल्पिक समाधान के रूप में दूसरे देशों जैसे कि अमरीका, रूस आदि से तेल आयात करने पर विचार कर सकता है।

Updated on:
05 Mar 2026 04:45 pm
Published on:
05 Mar 2026 04:45 pm