
छोटे पैकेट्स की बिक्री में इजाफा हुआ है। (PC: Freepik)
FMCG Market News: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे आम भारतीय की जेब तक पहुंच गया है। किराने की दुकानों और सुपरमार्केट में लोग अब बड़े पैकेट की बजाय 5 रुपये, 10 रुपये और 20 रुपये वाले छोटे पैक ज्यादा खरीद रहे हैं। खाने का तेल, बिस्किट, साबुन, शैंपू और डिटर्जेंट के छोटे पैक की बिक्री में जनवरी-मार्च तिमाही के मुकाबले अप्रैल में 4 से 10 फीसदी ज्यादा तेजी आई है। पारले, ब्रिटानिया, डाबर और AWL जैसी कंपनियों के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि इस बदलाव की रफ्तार अप्रैल महीने से काफी तेज हो गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव का सीधा असर FMCG कंपनियों के कच्चे माल और पैकेजिंग लागत पर पड़ा है। क्योंकि पॉलीमर (PET और HDPE) और प्लास्टिक पैकेजिंग फिल्में कच्चे तेल से बनती हैं, जिसके दाम काफी बढ़ गए हैं। इससे कंपनियों की लागत बढ़ी है। ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने सभी कैटेगरीज में अप्रैल के बाद से कीमतों में 4 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी की है। हालांकि, पॉपुलर छोटे पैकेट्स में कंपनियां कीमतें बढ़ाने की बजाय वजन कम कर रही है, जिससे बिक्री प्रभावित न हो। यही कारण है कि लोग छोटे पैकेट्स ज्यादा खरीद रहे हैं।
पारले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने बताया कि 20 रुपए तक के बिस्किट पैक की ग्रोथ, बड़े पैक से 3 से 4 फीसदी ज्यादा रही। यह बदलाव शहरी और अर्ध-शहरी बाजारों में ज्यादा दिख रहा है। ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर रक्षित हरगवे ने भी माना कि 5 और 10 रुपए वाले पैक की बिक्री बढ़ रही है और ये पैक कंपनी की कुल बिक्री का 60 से 65 फीसदी हिस्सा हैं।
AWL एग्री बिजनेस के एग्जीक्यूटिव डिप्टी चेयरमैन अंगशु मलिक ने बताया कि 200 मिलीलीटर और 500 मिलीलीटर तेल के पैक की डिमांड इस तिमाही में 8 से 10 फीसदी ज्यादा रही। कंपनी ने इन साइज के लिए अलग प्रोडक्शन लाइन भी शुरू की है।
कंपनियां कीमत बढ़ाने की बजाय श्रिंकफ्लेशन (Shrinkflation) का तरीका अपना रही हैं। यानी पैक की कीमत वही रखो, लेकिन अंदर सामान का वजन घटा दो। डाबर के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी ने 10 और 20 रुपए के पैक में वजन (ग्राम) कम करना शुरू किया है क्योंकि 5, 10 या 20 रुपये की कीमत वाले पैकिटो का दाम बढ़ाना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल सितंबर में GST कटौती के बाद कंपनियों ने कीमतें बनाए रखते हुए वजन बढ़ाया था। यानी कि पैकट की प्राइस वही रहेगी लेकिन वजन कम ज्यादा होता रहता है।
FMCG सेक्टर में छोटे पैक का हिस्सा 30 से 60 फीसदी तक है। डाबर में यह करीब 30 फीसदी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक कंपनियों पर लागत का दबाव बना रहेगा।
Published on:
06 Jun 2026 11:25 am
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