
भारत की जीडीपी ग्रोथ में इजाफा हुआ है। (PC: AI)
India GDP Growth Rate: दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। कहीं युद्ध का खतरा है, कहीं महंगाई सिर उठा रही है और कहीं व्यापारिक तनाव बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत की अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में देश की विकास दर 7.7 फीसदी रही, जो इससे पिछले साल के 7.1 फीसदी से अधिक है। हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह रफ्तार हमेशा बनी रहे, इसकी गारंटी नहीं है। महंगा कच्चा तेल, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, अल नीनो का असर और कमजोर मानसून जैसे कई खतरे आगे की राह में रोड़े अटका सकते हैं।
वही, जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से बेहतर रहा है। ब्लूमबर्ग के सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने 7.3 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया था। ऐसे में चौथी तिमाही के नतीजों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया।
इस बार GDP के आंकड़े नए आधार वर्ष के तहत जारी किए गए हैं। सरकार ने 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाया है और राष्ट्रीय आय के आंकड़ों में कई नए स्रोतों को भी शामिल किया है। इसका मकसद महामारी के बाद उपभोग के बदलते पैटर्न और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से मापना है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो महंगाई के प्रभाव को हटाने के बाद चौथी तिमाही में GDP बढ़कर 87.77 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 81.40 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं मौजूदा कीमतों के आधार पर GDP 9.1 फीसदी बढ़कर 94.65 लाख करोड़ रुपये रही। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो वास्तविक GDP बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 299.89 लाख करोड़ रुपये थी। मौजूदा कीमतों के आधार पर देश की अर्थव्यवस्था का आकार 346.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
आर्थिक गतिविधियों का अहम पैमाना मानी जाने वाली ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी GVA में भी मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। चौथी तिमाही में वास्तविक GVA 7.9 फीसदी बढ़कर 80.18 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। एक साल पहले यह 74.32 लाख करोड़ रुपये थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि निजी खपत और निवेश में मजबूती ने अर्थव्यवस्था को गति दी है। लोगों का खर्च बढ़ा है और कंपनियों ने भी निवेश जारी रखा है। यही वजह है कि विकास दर उम्मीद से बेहतर रही।
आगे चुनौतियां कम नहीं हैं। भू-राजनीतिक तनाव और अल नीनो से जुड़ी आपूर्ति संबंधी दिक्कतें आने वाले समय में इकोनॉमी पर असर डाल सकती हैं। अगर महंगाई बढ़ती है, वित्तीय स्थितियां और सख्त होती हैं या मानसून कमजोर रहता है, तो शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों की मांग पर दबाव पड़ सकता है।
अच्छे GDP आंकड़ों के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक भविष्य को लेकर थोड़ा सतर्क नजर आ रहा है। RBI ने हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताएं आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकती हैं। RBI के अनुमान के अनुसार अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर 6.6 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रह सकती है।
Updated on:
05 Jun 2026 05:22 pm
Published on:
05 Jun 2026 05:18 pm
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