BingeLabs co founder Divye Agrawal: अपने सोशल मीडिया पोस्ट में स्टार्टअप को-फाउंडर ने बताया है कि कर्मचारी को बिना किसी शर्त के पूरे 30 दिनों की छुट्टी दी गई, ताकि वह अपनी मां की देखभाल कर सके।
Divye Agarwal startup boss: अच्छा बॉस मिलना मुश्किल है और ऐसा बॉस जो आपकी हर परेशानी को समझे, और भी ज्यादा मुश्किल। सोशल मीडिया ग्रोथ फर्म बिंगलैब्स के को-फाउंडर दिव्य अग्रवाल (Divye Agarwal) मुश्किल से मिलने वाले बॉस की दुर्लभ लिस्ट में शामिल हैं। कम से कम एक सोशल मीडिया पोस्ट से तो यही समझ आता है। दिव्य अग्रवाल ने अपनी एक कर्मचारी को बीमार मां की देखभाल के लिए एक-दो नहीं बल्कि पूरे 30 दिनों की छुट्टी दी और वो भी बिना किसी सैलरी कटौती के साथ। इस दिलदारी के लिए उनकी जमकर तारीफ हो रही है।
दिल्ली बेस्ड स्टार्टअप बिंगलैब्स के को-फाउंडर दिव्य अग्रवाल ने लिंक्डइन पर इस घटना के बारे में बताया है। उन्होंने लिखा है कि पिछले साल उनकी एक कर्मचारी को अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए एक महीने की छुट्टी चाहिए थी। कर्मचारी ने कहा कि वह मां की देखभाल के साथ-साथ समय निकालकर काम में भी योगदान देती रहेगी। वह शाम को काम के लिए उपलब्ध रहेगी और जरूरत पड़ने पर कॉल भी अटेंड कर लेगी। हालांकि, मैनेजमेंट ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
अग्रवाल ने बताया कि हमने उस कर्मचारी से कहा कि काम के बारे में सोचने की कोई जरूरत नहीं है। पूरे 30 दिन केवल अपनी मां की देखभाल करें। सैलरी को लेकर भी बिल्कुल चिंता न करें, आपकी सैलरी नहीं काटी जाएगी। अग्रवाल ने कहा कि यह सुनकर कर्मचारी हैरान हो गई। उसने कहा - मुझे लग रहा था कि मेरी छुट्टी कुछ शर्तों के साथ ही मंजूर हो पाएगी। दिव्य अग्रवाल ने बताया कि एक महीने की छुट्टी से कंपनी के दो प्रोजेक्ट्स में देरी हुई। लेकिन छुट्टी के बाद जब कर्मचारी लौटी तो उसने बहुत अच्छा काम किया। क्योंकि वह अपनी मां की तबीयत को लेकर अब चिंतित नहीं थी।
बिंगलैब्स के को-फाउंडर ने कहा कि यह दर्शाता है कि जब कंपनी मुश्किल वक्त में अपने कर्मचारियों के साथ खड़ी होती है, तो कर्मचारी भी कंपनी की तरक्की के लिए अपनी जान लगा देते हैं। अग्रवाल ने कहा कि हमारी कंपनी की पॉलिसी बेहद स्पष्ट है, हम कर्मचारियों की परेशानियों को समझते हैं। उन्हें अगर समय चाहिए तो हम उन्हें समय देते हैं। हमने कर्मचारियों को यह विश्वास दिलाया है कि मैनेजमेंट जो कहता है, वो करता है। हमारी कथनी और करनी में अंतर नहीं है।
सोशल मीडिया पर दिव्य अग्रवाल की जमकर तारीफ हो रही है। एक यूजर ने लिखा - यह देखकर अच्छा लगा कि अभी भी ऐसी कंपनियां हैं, जो कर्मचारियों को इंसान समझती हैं। मैं पहले जिस कंपनी में काम करती थी, वहां मेरी सैलरी केवल इसलिए काट ली गई क्योंकि पीरियड के दर्द के चलते मैंने 30 मिनट पहले लॉग आउट कर दिया था। जबकि मैं अपना काम पहले ही पूरा कर चुकी थी। एक दूसरे यूजर ने लिखा है कि ऐसी लीडरशिप मुश्किल से देखने को मिलती है। बिना किसी शर्त के कर्मचारी को सपोर्ट करना तारीफ के काबिल है। अगर कंपनी कर्मचारियों की परेशानी को समझती है, तो कर्मचारी भी उसे अपना समझकर काम करते हैं।
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