
बजट (PC: AI)
Budget 2026 income tax relief: एक फरवरी को पेश होने वाले देश के बजट (Budget 2026) में इनकम टैक्स के मोर्चे पर क्या राहत मिलेगी? आज के समय में यह सबसे बड़ा सवाल है। पिछले बजट में वित्त मंत्री ने न्यू टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाने के लिए कई कदम उठाए थे। टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया, ताकि अधिकतर लोग नई रिजीम को चुनें। जानकारों का मानना है कि इस बार इनकम टैक्स पर कोई बड़ी राहत की उम्मीद मुश्किल है, लेकिन सरकार न्यू रिजीम को और बेहतर बनाने के लिए कुछ घोषणाएं जरूर कर सकती है। क्योंकि पुरानी कर प्रणाली में अब भी कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जो उसे आकर्षक बनाए हुए हैं।
नई टैक्स व्यवस्था में डिडक्शन के कम प्रावधान एक बड़ी समस्या हैं। इसके तहत, टैक्सपेयर्स सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन और NPS में एम्प्लॉयर के योगदान का दावा कर सकते हैं, जबकि HRA और मेडिकल इंश्योरेंस जैसे फायदे उपलब्ध नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ जरूरी डिडक्शन को न्यू टैक्स रिजीम में शामिल करके इसे और आकर्षक बनाया जा सकता है। नई प्रणाली, पुरानी प्रणाली से सरल है, लेकिन डिडक्शन प्रावधानों में कमी समस्या है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में आनंद राठी वेल्थ की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजनी के हवाले से बताया गया है कि HRA और मेडिकल इंश्योरेंस जैसे लिमिटेड डिडक्शन की इजाज़त देने से नए टैक्स सिस्टम को काफी बेहतर किया जा सकता है।
डेलॉइट इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नितिन बैजल कहते हैं कि मेडिकल खर्च लगातार बढ़ रहे हैं और नई टैक्स व्यवस्था में मेडिक्लेम डिडक्शन (Mediclaim Deduction) का न होना एक बड़ा मुद्दा है। उनका यह भी कहना है कि वित्त मंत्री अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाती हैं, तो भी यह राहत हो सकती है। इससे उन सैलरीपेशा लोगों को फायदा मिल सकता है, जो कई छूट छोड़कर नई कर प्रणाली का हिस्सा बने हैं। स्टॉकटिक कैपिटल के फाउंडर विजय माहेश्वरी के अनुसार, स्टैंडर्ड डिडक्शन को 1-1.25 लाख रुपए तक बढ़ाने से महंगाई की भरपाई करने में मदद मिलेगी और नए सिस्टम का हिस्सा बने सैलरीड कर्मचारियों की टेक-होम इनकम बेहतर होगी।
एक्स्पर्ट्स के अनुसार, एजुकेशन लोन और होम लोन से जुड़े टैक्स बेनिफिट भी पुराने सिस्टम तक ही सीमित हैं। ऐसे में बजट 2026 में इन्हें नई कर प्रणाली के तहत लाने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इन डिडक्शन को मैनेज करना काफी आसान है, क्योंकि ये बैंकों और फॉर्मल फाइनेंशियल संस्थानों से जुड़े होते हैं। अधिकांश जानकारी पहले से ही बैंक स्टेटमेंट और एम्प्लॉयर सिस्टम के ज़रिए उपलब्ध है, इसलिए कंप्लायंस कोई मुद्दा नहीं बनेगा। ऐसे बेनिफिट्स को शामिल करने से नए सिस्टम की प्रैक्टिकैलिटी बेहतर हो सकती है, साथ ही यह ज्यादा करदाताओं को आकर्षित कर पाएगी।
नया टैक्स सिस्टम सीनियर सिटिजन्स के लिए अब भी खास आकर्षक नहीं है। इसमें हायर बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट और हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन की इजाजत नहीं है। जबकि उम्र के साथ मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ रहा है। एक्स्पर्ट्स का कहना है कि नए सिस्टम में सीनियर सिटिजन्स को अतिरिक्त राहत देने की पूरी गुंजाइश है। इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि निर्मला सीतारमण इस बजट में कुछ जरूरी प्रावधान करेंगी। ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अब भी कई फायदे हैं। यही वजह है कि वे पुरानी व्यवस्था के तहत बने रहना अधिक पसंद कर रहे हैं।
एक्स्पर्ट्स का कहना है कि ऐसे सैलरीड कर्मचारी, जिनकी सैलरी में HRA शामिल है, उन्हें पुरानी प्रणाली ज्यादा अच्छी लगती है। न्यू रिजीम में भले ही टैक्स स्लैब कम हैं, लेकिन कई छूट नहीं मिलती हैं। इसमें हाउस रेंट अलाउंस (HRA), सेक्शन 80C के तहत निवेश पर छूट, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट और होम लोन पर ब्याज के लिए सेक्शन 24 पर मिलने वाली छूट प्रमुख हैं। ऐसे में अगर सरकार को नई प्रणाली को अधिक आकर्षक बनाना है, तो इनमें से कुछ छूट प्रदान करने के बारे में सोचना होगा। पूरी उम्मीद है कि वित्त मंत्री इस दिशा में कोई न कोई घोषणा जरूर करेंगी।
Updated on:
17 Jan 2026 10:55 am
Published on:
17 Jan 2026 10:49 am
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