बजट 2026 में सरकार कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 23,000 करोड़ रुपये तक के इंसेंटिव पैकेज की घोषणा कर सकती है। इसका फोकस आयात निर्भरता घटाने, घरेलू उत्पादन और टेक्नोलॉजी विकास पर रहेगा।
आगामी केंद्रीय बजट 2026 को लेकर औद्योगिक नीति से जुड़ी चर्चाएं तेज हैं और सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देने के लिए कई नए कदमों पर विचार कर रही है। बीते कुछ वर्षों में कैपिटल गुड्स सेक्टर को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखा गया है, क्योंकि यह इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल और हेवी इंडस्ट्री से सीधे जुड़ा है। इसी सिलसिले में सरकार बजट 2026 में स्थानीय कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए करीब 23,000 करोड़ रुपये तक के इंसेंटिव पैकेज की घोषणा कर सकती है, जिसका उद्देश्य आयात निर्भरता घटाना और घरेलू वैल्यू चेन को मजबूत करना बताया जा रहा है।
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित इंसेंटिव पैकेज के तहत कंस्ट्रक्शन उपकरण और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए अलग-अलग योजनाएं शामिल की जा सकती हैं। कंस्ट्रक्शन उपकरण के लिए 14,000 से 16,000 करोड़ रुपये की योजना अंतिम चरण में मानी जा रही है, जिसमें टनल बोरिंग मशीन, क्रेन और अन्य हाई-एंड मशीनरी के घरेलू उत्पादन पर जोर रहेगा। इसके अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये की स्कीम के जरिए ग्लोबल वैल्यू चेन को मजबूत करने की योजना पर काम चल रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य देश में हाई वैल्यू कैपिटल गुड्स का उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
नई प्रस्तावित योजनाएं सरकार के पहले से जारी प्रयासों को आगे बढ़ाने वाली मानी जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2022 में हेवी इंडस्ट्री मंत्रालय ने इंडियन कैपिटल गुड्स सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए योजना का दूसरा चरण शुरू किया था, जिसके तहत 1,207 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसका फोकस साझा टेक्नोलॉजी और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर रहा है। इसके अलावा 2025-26 के बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी और मोबाइल फोन की बैटरी के निर्माण से जुड़े कैपिटल गुड्स पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी की छूट का दायरा बढ़ाया गया था, जिससे घरेलू उत्पादन को समर्थन मिला।
कैपिटल गुड्स सेक्टर के कई अहम कंपोनेंट अभी भी चीन, जापान, साउथ कोरिया और जर्मनी जैसे देशों से आयात किए जाते हैं। इनमें हाइड्रोलिक्स, अंडरकैरेज, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट, सेंसर और टेलीमैटिक्स जैसे हाई-टेक पार्ट्स शामिल हैं। प्रस्तावित इंसेंटिव स्कीम के तहत इन कंपोनेंट्स के स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम, 360 डिग्री कैमरा और सेंसर जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने की योजना है, जिससे घरेलू वैल्यू एडिशन और संभावित एक्सपोर्ट अवसरों में इजाफा हो सकता है