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50,000 रुपये है सैलरी तो भी बन सकता है 1 करोड़ का फंड, जानिए पूरा कैलकुलेशन

50,000 रुपये की मासिक सैलरी से भी लंबी अवधि में 1 करोड़ रुपये का फंड बनाया जा सकता है। नियमित SIP, 12 प्रतिशत औसत रिटर्न और 21 साल की अवधि में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।

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भारत

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Thalaz Sharma

Jan 06, 2026

1 crore sip

SIP से 21 साल में 1 करोड़ जोड़े जा सकते हैं। (PC: AI)

बढ़ती महंगाई के बीच देश के बड़े शहरों में 50,000 रुपये की मासिक सैलरी को कई लोग सीमित आय मानते हैं। हालांकि, पर्सनल फाइनेंस के आंकड़े बताते हैं कि नियमित निवेश और चक्रवृद्धि ब्याज के असर से इसी सैलरी के आधार पर लंबी अवधि में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड तैयार किया जा सकता है। इसके लिए समय, अनुशासन और तय निवेश ढांचे की भूमिका अहम होती है।

चक्रवृद्धि ब्याज से बनता है बड़ा फंड

निवेश पर मिलने वाला रिटर्न, जब दोबारा निवेश में जुड़कर आगे और रिटर्न पैदा करता है, उसी को चक्रवृद्धि ब्याज बोला जाता है। लंबी अवधि में यही प्रक्रिया छोटे-छोटे निवेश को बड़े फंड में बदल देती है। अगर कोई व्यक्ति 21 साल तक हर महीने 10,000 रुपये का निवेश करता है और उसे औसतन 12 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न मिलता है, तो कुल निवेश करीब 25.2 लाख रुपये होता है। इसी अवधि में अनुमानित रिटर्न करीब 79 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकता है, जिससे मैच्योरिटी पर फंड 1 करोड़ रुपये से ज्यादा बन जाता है।

मंथली SIP से आसान निवेश

नियमित निवेश के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP को सबसे व्यावहारिक तरीका माना जाता है। इसमें हर महीने एक तय रकम निवेश करनी होती है, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर औसत हो जाता है। 50,000 रुपये की सैलरी में से अगर 20 से 30 प्रतिशत रकम निवेश के लिए अलग रखी जाए, तो 10,000 से 15,000 रुपये की मासिक SIP शुरू की जा सकती है। लंबे समय तक लगातार SIP जारी रहने पर कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज का प्रभाव तेजी से दिखता है।

निवेश अवधि बढ़ने से घटता दबाव

फाइनेंस से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि निवेश जितनी जल्दी शुरू होता है, लक्ष्य उतना ही आसान हो जाता है। अगर मासिक निवेश 20,000 रुपये कर दिया जाए और रिटर्न 12 प्रतिशत के आसपास रहे, तो करीब 16 साल में 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल हो सकता है। वहीं, 20 से 30 साल का निवेश समय मिलने पर मासिक रकम और भी कम हो जाती है, जिससे बड़ा फंड बन जाता है। लंबी अवधि निवेशक को बाजार के उतार-चढ़ाव से उबरने का समय देती है।