
CIBIL Score After Marriage: शादी के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे की जिम्मेदारियां जरूर साझा करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों का CIBIL स्कोर भी एक हो जाता है। अगर पति या पत्नी में से किसी एक का क्रेडिट स्कोर खराब है, तो इसका दूसरे के स्कोर पर सीधे कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, जब दोनों मिलकर होम लोन, पर्सनल लोन या किसी दूसरे तरह के कर्ज के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक दोनों की क्रेडिट हिस्ट्री और कमाई की जांच कर सकता है। ऐसे में एक पार्टनर का खराब क्रेडिट रिकॉर्ड लोन मिलने का रास्ता मुश्किल कर सकता है।
इसलिए शादी के बाद बड़े वित्तीय फैसले लेने से पहले पति-पत्नी को अपनी क्रेडिट हिस्ट्री, पुराने कर्ज और ईएमआई की स्थिति के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। इससे न केवल लोन लेने में आसानी होती है, बल्कि भविष्य में पैसों को लेकर होने वाली परेशानियों से भी बचा जा सकता है।
क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर किसी व्यक्ति की कर्ज चुकाने की क्षमता और पुराने भुगतान के रिकॉर्ड का एक अहम संकेत है। इसे बैंक और वित्तीय संस्थान लोन या क्रेडिट कार्ड देने से पहले देखते हैं। भारत में ट्रांसयूनियन सिबिल, एक्सपेरियन, इक्विफैक्स और CRIF हाई मार्क जैसी क्रेडिट ब्यूरो कंपनियां क्रेडिट रिपोर्ट तैयार करती हैं। आम तौर पर क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। 750 या इससे ज्यादा का स्कोर आमतौर पर अच्छा माना जाता है, हालांकि, अलग-अलग बैंक अपनी शर्तों के आधार पर फैसला लेते हैं। अच्छा क्रेडिट स्कोर होने पर लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इसके अलावा, कुछ मामलों में बेहतर ब्याज दर या लोन की अनुकूल शर्तें मिलने में भी मदद मिल सकती है।
शादी करने से पति-पत्नी का क्रेडिट स्कोर आपस में नहीं जुड़ता। दोनों की क्रेडिट रिपोर्ट अलग-अलग रहती हैं। अगर पति ने पहले किसी लोन की ईएमआई नहीं चुकाई है या पत्नी के क्रेडिट कार्ड का बिल बकाया है, तो सिर्फ शादी हो जाने से दूसरे पार्टनर का सिबिल स्कोर खराब नहीं हो जाता। इसी तरह, किसी एक पार्टनर पर ज्यादा कर्ज होने या उसका क्रेडिट रिकॉर्ड खराब होने से दूसरे की क्रेडिट रिपोर्ट अपने आप प्रभावित नहीं होती। लेकिन मामला तब बदल जाता है, जब दोनों मिलकर किसी लोन के लिए आवेदन करते हैं।
मान लीजिए पति-पत्नी मिलकर घर खरीदने के लिए होम लोन लेना चाहते हैं। बैंक ऐसे मामले में दोनों की कमाई, क्रेडिट स्कोर, पुराने लोन और भुगतान का रिकॉर्ड देख सकता है। अगर एक पार्टनर का क्रेडिट स्कोर कम है, उस पर पहले से काफी कर्ज है या उसने हाल में किसी लोन का भुगतान नहीं किया है, तो बैंक पूरे आवेदन को जोखिम भरा मान सकता है। इसका असर लोन की मंजूरी, मिलने वाली रकम, ब्याज दर या दूसरी शर्तों पर पड़ सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर पति का क्रेडिट स्कोर अच्छा है, लेकिन पत्नी का स्कोर 650 से कम है और दोनों जॉइंट होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक पत्नी के क्रेडिट रिकॉर्ड को भी ध्यान में रख सकता है। हालांकि, लोन मंजूर होगा या नहीं, यह बैंक की नीति, दोनों की आय और दूसरे वित्तीय पहलुओं पर निर्भर करेगा। यही बात जॉइंट पर्सनल लोन और दूसरे जॉइंट लोन्स पर भी लागू हो सकती है।
अगर पति-पत्नी ने मिलकर लोन लिया है या दोनों किसी क्रेडिट खाते से जुड़े हैं, तो भुगतान में देरी का असर दोनों के क्रेडिट रिकॉर्ड पर पड़ सकता है। खासकर तब, जब उस खाते की जानकारी दोनों की क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज होती है। इसके अलावा, लोन के समझौते के मुताबिक भुगतान की जिम्मेदारी भी दोनों पर आ सकती है। इसलिए किसी भी लोन में पार्टनर के साथ जुड़ने से पहले उसकी शर्तों और भुगतान की जिम्मेदारियों को अच्छी तरह समझना जरूरी है।
इस सवाल का जवाब समझना जरूरी है। शादी से पहले पति या पत्नी ने जो पर्सनल लोन लिया था, उसकी जिम्मेदारी सामान्य तौर पर उसी व्यक्ति की रहती है जिसने लोन लिया है। सिर्फ शादी हो जाने से दूसरा पार्टनर उस कर्ज का जिम्मेदार नहीं बन जाता। हालांकि, अगर वह बाद में लोन में सह-उधारकर्ता बनता है, गारंटर की भूमिका स्वीकार करता है या किसी अन्य तरीके से कानूनी जिम्मेदारी लेता है, तो स्थिति बदल सकती है।