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त्योहारों पर खरीदारी से पहले बजट की चिंता, 54% परिवारों की आर्थिक हालत पहले से हुई कमजोर, गावों में ज्यादा है तंगी

Festive Season Shopping: सी वोटर के सर्वे के मुताबिक, 53.6% भारतीय परिवारों की आर्थिक स्थिति पिछले साल के मुकाबले खराब हुई है। आर्थिक दबाव के बावजूद लोग त्योहारों पर कपड़े, मिठाई और ट्रेवल पर खर्च करना चाहते हैं। हालांकि, महंगे सामान की खरीदारी और बड़े खर्चों को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
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भारत

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Pawan Jayaswal

•

Oct 10, 2026

CVoter Survey 2026

फेस्टिव शॉपिंग से पहले लोगों को बजट की चिंता सता रही है। (PC: AI)

त्योहारी सीजन में कपड़े, मिठाई और घूमने-फिरने की इच्छा तो है, लेकिन परिवार के बजट की चिंता लोगों के कदम खींच रही है। महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, गाड़ी और गहने खरीदने के मामले में लोग ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। सी वोटर के एक ताजा सर्वे के मुताबिक, 53.6% लोगों का कहना है कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति एक साल पहले के मुकाबले खराब हुई है। वहीं, 11.6% लोगों ने आर्थिक स्थिति सुधरने की बात कही।

28 और 29 सितंबर 2026 को 2,051 लोगों के बीच किए गए इस सर्वे में त्योहारों के दौरान खरीदारी, खर्च, ट्रेवल, पेमेंट के तरीके और घर की मरम्मत जैसे मुद्दों पर लोगों की राय जानी गई। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि इस बार त्योहारों पर खर्च करने की इच्छा के साथ-साथ पैसे बचाने की चिंता भी बनी हुई है।

गांवों में ज्यादा परेशान हैं परिवार

सर्वे में शहरी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। शहरी क्षेत्रों में 40.6% लोगों ने कहा कि उनके परिवार की आर्थिक हालत पिछले साल के मुकाबले खराब हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा कहने वालों की संख्या 59.2% रही। कम आय वाले परिवारों में आर्थिक दबाव ज्यादा दिखाई दिया। इस वर्ग के 63.2% लोगों ने अपनी आर्थिक स्थिति बिगड़ने की बात कही। इसके मुकाबले अधिक आय वाले परिवारों में 26.3% लोगों ने ही आर्थिक हालत खराब होने की जानकारी दी।

आने वाले एक साल को लेकर भी लोगों की उम्मीदें बहुत मजबूत नहीं हैं। सर्वे में 24.4% लोगों को लगता है कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, जबकि 38% को इसके और बिगड़ने की आशंका है। करीब 24% लोगों ने स्थिति पहले जैसी रहने की उम्मीद जताई, जबकि 13.6% लोग इस बारे में कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे।

सर्वे के प्रमुख नतीजों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस त्योहारी सीजन में खर्च घटाने की योजना बनाने वाले लोगों की संख्या 35% से ज्यादा है। इसके उलट, 10% से भी कम लोग खर्च बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं।

कपड़े और मिठाई की होगी खरीदारी

आर्थिक दबाव के बावजूद त्योहारों पर कपड़े खरीदने और मिठाई बांटने जैसी परंपराओं का आकर्षण बना हुआ है। हालांकि, हर परिवार इस बार नई खरीदारी करने की स्थिति में नहीं है। सर्वे में करीब 45% लोगों ने कहा कि उन्होंने परिवार के कम से कम एक सदस्य के लिए नए कपड़े खरीद लिए हैं या खरीदने की योजना है। इनमें 16.9% लोग पूरे परिवार के लिए कपड़े खरीदना चाहते हैं। वहीं, 20.4% लोगों ने बच्चों के लिए कपड़े खरीदने की बात कही। करीब 6.2% लोग अपने लिए और 4.8% परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए कपड़े खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी ओर, 45.4% लोगों ने कहा कि वे इस त्योहारी सीजन में नए कपड़े खरीदने की योजना नहीं बना रहे हैं। इससे साफ है कि परिवार गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं।

मिठाई के मामले में स्थानीय दुकानों की पकड़ मजबूत दिखाई दे रही है। करीब 33% लोगों ने कहा कि वे स्थानीय मिठाई की दुकान से मिठाई खरीदना पसंद करेंगे। वहीं, 8.7% लोग मिठाई और चॉकलेट दोनों खरीदने की योजना बना रहे हैं।

महंगे सामान खरीदने से बच रहे लोग

त्योहारी सीजन में बड़ी खरीदारी को लेकर लोगों का रुख सतर्क है। सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 21.5% लोगों ने रसोई के उपकरण खरीदने की योजना बताई। इलेक्ट्रॉनिक्स सामान खरीदने की बात 18.5% लोगों ने कही। दोपहिया वाहन, कार, सोना या गहने खरीदने की योजना बनाने वालों का हिस्सा करीब 22% रहा। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो एक से ज्यादा कैटेगरीज में खरीदारी करना चाहते हैं। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि लोग इस बार जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बड़ी रकम खर्च करने वाले सामान की खरीदारी पर फैसला लेने से पहले वे अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

बड़ी खरीदारी के लिए EMI का सहारा

महंगे सामान खरीदने के मामले में भुगतान का तरीका भी लोगों की आर्थिक स्थिति की झलक देता है। सर्वे में 32.2% लोगों ने कहा कि वे खरीदारी के समय पूरी रकम चुकाना पसंद करेंगे। वहीं, 12.8% लोग ईएमआई या किस्तों के जरिए भुगतान करने की योजना बना रहे हैं। करीब 14.7% लोगों ने कहा कि वे कुछ खरीदारी का भुगतान एकमुश्त और कुछ का किस्तों में कर सकते हैं। दूसरी ओर, 32.1% लोगों ने बताया कि वे कोई बड़ी खरीदारी करने की योजना ही नहीं बना रहे हैं।