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CNG PNG Price Cut: साल के पहले दिन बड़ा तोहफा, सस्ती हो गई सीएनजी और पीएनजी, जानिए कितने घट गए दाम

CNG PNG Price Cut: सीएनजी और पीएनजी की दरें 1 जनवरी 2026 से घट गई हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दोनों गैस पर कीमतों को कम किया है।

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Jan 01, 2026
सीएनजी-पीएनजी की कीमतों में गिरावट आई है।

CNG PNG Price Cut: वाहन चालकों और गृहणियों के लिए नया साल गुड न्यूज लेकर आया है। गाड़ियों में काम आने वाली सीएनजी और घरों में यूज होने वाली पीएनजी दोनों ही सस्ती हो गई हैं। गैस डिस्ट्रीब्यूटर इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने गुरुवार, 1 जनवरी 2026 से CNG और PNG की कीमतों में कटौती की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के ‘वन नेशन, वन टैरिफ’ विजन के अनुरूप कीमतों में कमी हुई है।

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कितनी सस्ती हुई CNG-PNG

नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में PNG की कीमतों में 70 पैसे प्रति यूनिट की कटौती की गई है। जबकि कंपनी के सभी सेवा क्षेत्रों में CNG की कीमत 3 रुपये प्रति किलोग्राम तक घटाई गई है। नई दरें वर्ष 2026 के पहले दिन सुबह 6 बजे से लागू हो गईं हैं। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ और किफायती ईंधन के विजन के अनुरूप है।

वन नेशन, वन ग्रिड, वन टैरिफ

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) का ‘वन नेशन, वन ग्रिड, वन टैरिफ’ सुधार पूरे देश में प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए एक समान टैरिफ लागू करने का लक्ष्य रखता है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय मूल्य असमानताओं को कम करना, उपभोक्ताओं के लिए गैस को अधिक किफायती बनाना और सप्लाई सोर्सेस से दूरी की परवाह किए बिना गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है।

पहले कीमतें कैसे तय होती थीं?

अब तक CNG और PNG की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करती थीं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • PNGRB द्वारा तय दूरी-आधारित गैस परिवहन टैरिफ
  • अलग-अलग सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों की लागत स्ट्रक्चर
  • राज्य कर (स्टेट लेवी)
  • घरेलू गैस आवंटन या स्पॉट/LNG दरों से जुड़ी इनपुट लागत

इन्हीं कारणों से देश के अलग-अलग हिस्सों में CNG और PNG की खुदरा कीमतों में अंतर देखने को मिलता था। प्राकृतिक गैस परिवहन लागत, जो CNG और PNG की अंतिम कीमत का एक अहम हिस्सा होती है, PNGRB द्वारा तय दूरी-आधारित टैरिफ जोन के अनुसार निर्धारित की जाती थी। ये तीन जोन इस प्रकार थे:

  • 200 किलोमीटर तक
  • 200 से 1,200 किलोमीटर
  • 1,200 किलोमीटर से अधिक

हर जोन के लिए प्रति यूनिट गैस पर अलग-अलग परिवहन शुल्क लगता था। दूरी जितनी अधिक, परिवहन शुल्क उतना ज्यादा होता था। इसका मतलब यह था कि गैस स्रोत केंद्रों से दूर रहने वाले उपभोक्ताओं को अधिक परिवहन लागत चुकानी पड़ती थी।

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Published on:
01 Jan 2026 10:45 am
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