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बड़े क्रेडिट कार्ड बिल को EMI में कन्वर्ट करवा रहे हैं तो पहले यह जरूर देख लें, वरना लग जाएगा चूना

Credit Card Bill: जीरो कॉस्ट ईएमआई असल में कॉस्ट फ्री नहीं होती, बल्कि लागत को प्रोडक्ट की कीमत में डिस्काउंट के रूप में पहले ही एडजस्ट कर लिया जाता है।
3 min read
Mar 24, 2026
Credit Card Bil
जीरो कॉस्ट ईएमआई पूरी तरह फ्री नहीं होती। (PC: AI)

Credit Card Bill: कई बार ऐसा होता है कि क्रेडिट कार्ड का बिल काफी बड़ा बन जाता है। ऐसे में ड्यू डेट तक इस बिल को चुकाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। इस बकाया बिल को EMI में बदलना अक्सर सबसे आसान विकल्प लगता है। इसमें आप पूरी राशि एक साथ चुकाने के बजाय तय अवधि में हर महीने एक निश्चित रकम चुकाते हैं। जब बड़ी राशि छोटी-छोटी मासिक किस्तों में बंट जाती है, तो भुगतान का दबाव लगभग खत्म हो जाता है। 30,000 रुपये की खरीदारी 12 महीने की EMI में बदलने पर 30,000 रुपये नहीं लगती, बल्कि 2,800 रुपये प्रति माह जैसी लगती है, जो दिखने में काफी आसान लगती है।

छोटी-छोटी किस्तों में भुगतान करना आकर्षक लगता है और वित्तीय दबाव कम करता है, लेकिन इसकी एक कीमत भी होती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, EMI तब मददगार होती है, जब एकमुश्त भुगतान करना मुश्किल हो, लेकिन इसकी लागत को ध्यान से समझना जरूरी है।

क्या है क्रेडिट कार्ड EMI की असली लागत?

EMI पर ब्याज दर आमतौर पर 12% से 24% सालाना के बीच होती है, लेकिन यही पूरी लागत नहीं है। इसके साथ प्रोसेसिंग फीस, GST जैसे अतिरिक्त शुल्क भी जुड़ते हैं, जिससे कुल लागत काफी बढ़ जाती है। अधिकांश बैंक 1% से 3% तक प्रोसेसिंग फीस या एक निश्चित शुल्क लेते हैं। इसके अलावा ब्याज और फीस दोनों पर 18% GST लगता है। साथ ही, यदि आप पूरा भुगतान करते हैं, तो मिलने वाले डिस्काउंट का नुकसान भी होता है। कुछ बैंक समय से पहले लोन चुकाने पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज भी लगाते हैं। अगर आप जल्दी भुगतान करना चाहें तो 1 से 3% तक का पेनल्टी चार्ज लग सकता है। यदि एक EMI भी मिस हो जाए, तो पूरी बकाया राशि पर क्रेडिट कार्ड की ऊंची ब्याज दर लागू हो सकती है।

'Zero-Cost EMI' क्या सच में फ्री है?

‘Zero-Cost EMI’ ऑफर सुनने में बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन असलियत कुछ और हो सकती है। इसमें ब्याज खत्म नहीं होता, बल्कि उसे पहले से डिस्काउंट के रूप में एडजस्ट किया जाता है, जो ब्रांड या रिटेलर बैंक को देता है। इसका मतलब है कि आप ब्याज सीधे नहीं देख रहे, लेकिन उत्पाद की कीमत में ही उसे शामिल कर दिया जाता है। इसलिए खरीदने से पहले यह जांचना जरूरी है कि कहीं प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाई तो नहीं गई है। साथ ही प्रोसेसिंग फीस और GST भी लागू हो सकते हैं, जिससे “जीरो-कॉस्ट” का फायदा कम हो जाता है।

बिल को कब EMI में बदलना सही है

सवाल यह नहीं है कि EMI अच्छी है या बुरी, बल्कि यह है कि क्या यह आपकी स्थिति के लिए सही है। क्या यह खर्च ऐसा है, जो टाला नहीं जा सकता? अगर हां, तो EMI सही विकल्प हो सकता है। अगर नहीं, तो शायद इसे टालना बेहतर है। जैसे मेडिकल इमरजेंसी या जरूरी उपकरण (जैसे फ्रिज या काम का डिवाइस) खराब हो जाए, तो ऐसे मामलों में EMI लेना उचित हो सकता है।

EMI Vs Personal Loan Vs BNPL

अगर आपको उधार लेना ही है, तो सही विकल्प चुनना जरूरी है। सही सवाल यह नहीं कि कौन सा सस्ता है, बल्कि यह है कि कौन सा आपके समय के हिसाब से सही है। BNPL (Buy Now Pay Later) शॉर्ट टर्म के लिए अच्छा है, यदि समय पर भुगतान करें। क्रेडिट कार्ड EMI का सोच रहे हैं, तो 3 से 12 महीने का समय सही है। वहीं, पर्सनल लोन लॉन्ग टर्म के लिए बेहतर विकल्प है। अक्सर लोग वही विकल्प चुनते हैं जो तुरंत उपलब्ध हो, न कि जो लंबे समय के लिए सही हो, यही गलती कर्ज को महंगा बना देती है।

EMI का क्रेडिट स्कोर पर असर

EMI आपके क्रेडिट स्कोर को दो तरह से प्रभावित करती है:

  1. क्रेडिट उपयोग (Utilisation): पूरी राशि लिमिट में ब्लॉक हो जाती है, जिससे उपयोग प्रतिशत बढ़ जाता है। 30% से कम उपयोग सुरक्षित माना जाता है, जबकि 40% से ज्यादा होने पर जोखिम माना जाता है।
  2. भुगतान व्यवहार: समय पर भुगतान करने से स्कोर बेहतर होता है।
Updated on:
24 Mar 2026 01:14 pm
Published on:
24 Mar 2026 01:14 pm
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