
कई वजहों के चलते सोना गिर रहा है। (PC: AI)
Why Gold Price Crash Today: अनिश्चितता के समय सोने को सेफ हैवन एसेट समझा जाता है। लेकिन सोना इस बार अलग रंग दिखा रहा है। सोने को लेकर यह थ्योरी रही है कि जब भी कोई भू-राजनीतिक तनाव पैदा होता है, शेयर मार्केट में मंदी आती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोई संकट आता है, तब सोने के भाव तेजी से ऊपर की तरफ जाते हैं। लेकिन इस बार बिल्कुल उल्टा हो रहा है। यूएस-ईरान-इजराइल युद्ध तेजी से बढ़ रहा है। शेयर मार्केट में भारी गिरावट है। इसके बावजूद सोने में जबरदस्त मंदी देखी जा रही है। एमसीएक्स एक्सचेंज पर सोमवार को सोना 1,30,009 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा है। वहीं, चांदी का घरेलू वायदा भाव 2,03,017 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करता दिखा है।
यूएस-ईरान-इजराइल युद्ध अब 24वें दिन में पहुंच चुका है, जिसमें अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है। इस दौरान दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण कमोडिटी कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में कीमती धातुओं को मजबूती मिलती है। लेकिन इस बार ट्रेंड उलट गया है।
मजबूत डॉलर ने खरीदारी पर लगाया ब्रेक
इस समय सोने पर दबाव डालने वाला सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। भू-राजनीतिक तनाव के समय निवेशक सिर्फ सोने में ही नहीं, बल्कि डॉलर में भी निवेश करते हैं, क्योंकि डॉलर ज्यादा तरल (लिक्विड) और वैश्विक स्तर पर अधिक स्वीकार्य है। यूएस डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.15 तक पहुंच गया है। सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए मजबूत डॉलर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा कर देता है, जिससे निवेश और फिजिकल डिमांड दोनों घट जाती हैं। इस वजह से भू-राजनीतिक तनाव का सकारात्मक असर सोने पर कम हो गया है।
कच्चे तेल से बढ़ती महंगाई की चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और बढ़ते तनाव ने निवेशकों में 'रिस्क-ऑफ' माहौल बना दिया है। ऐसे समय में निवेशक कैश बढ़ाते हैं और जोखिम वाले निवेश कम करने लगते हैं। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, ऐसे दौर में सोने जैसे सेफ हैवन एसेट्स भी शॉर्ट टर्म में बिकवाली का सामना कर सकते हैं, क्योंकि निवेशक मार्जिन कॉल पूरी करने या पोर्टफोलियो संतुलित करने के लिए अपनी होल्डिंग्स बेचते हैं। इससे ब्याज देने वाले निवेश मजबूत होते हैं और सोने का आकर्षण कम हो जाता है।
यूएस फेड का सख्त रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में अपनी पॉलिसी बैठक में ब्याज दरें 3.5% से 3.75% के बीच स्टेबल रखी हैं, लेकिन संकेत दिए कि जल्द रेट कट की संभावना कम है। यह सख्त रुख भी सोने के लिए नकारात्मक है।
2025 में आई भाई तेजी के बाद मुनाफावसूली
मिडिल ईस्ट में युद्ध से पहले ही सोना 2025 में करीब 70% तक बढ़ चुका था। इतनी तेज तेजी के बाद कीमतें ऊंची हो गई थीं, जिससे निवेशक नए निवेश से बच रहे थे। जैसे ही बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया, जिससे खरीदारी के बजाय बिकवाली बढ़ गई। यह लंबे समय की तेजी के बाद सामान्य ट्रेंड होता है।
लिक्विडिटी भी बनी कारण
कठिन समय में निवेशक सबसे पहले लिक्विडिटी (नकदी) को प्राथमिकता देते हैं। सोना दुनिया के सबसे लिक्विड एसेट्स में से एक है, इसलिए लोग इसे बेचकर नकदी जुटाते हैं। उदाहरण के तौर पर दुबई में बड़ी संख्या में लोग सोना बेच रहे हैं। कुछ ज्वेलरी बेच रहे तो कुछ गोल्ड बार, ताकि कैश बना सकें। कई भारतीय मूल के लोग भी इसमें शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना 100 से ज्यादा लोग सोना बेचने पहुंच रहे हैं और ज्वेलर्स करीब 1 किलो सोना प्रतिदिन खरीद रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव बढ़ता है। जब बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिलता है, तो निवेशक सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट से पैसा निकालकर बॉन्ड में निवेश करते हैं।
महंगाई
इन सभी कारणों ने ऊर्जा आधारित महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अब बाजार को डर है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो केंद्रीय बैंक और सख्त रुख अपना सकते हैं, जिससे सोने जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स और कमजोर हो सकते हैं।
Updated on:
23 Mar 2026 05:58 pm
Published on:
23 Mar 2026 05:58 pm
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