Denta Water IPO: डेंटा वॉटर और इंफ्रा सॉल्यूशंस का IPO आज से निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। इस IPO के जरिए कंपनी लगभग 220 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। आइए जानते है पूरी खबर।
Denta Water IPO: डेंटा वॉटर और इंफ्रा सॉल्यूशंस का IPO आज से निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। इस IPO के जरिए कंपनी लगभग 220 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। IPO पूरी तरह से फ्रेश इक्विटी सेल पर आधारित है, जिसमें 75 लाख शेयर जारी किए जाएंगे। इस लेख में हम IPO से जुड़ी सभी प्रमुख जानकारी जैसे प्राइस बैंड, GMP और सब्सक्रिप्शन डिटेल्स पर चर्चा करेंगे।
डेंटा वॉटर IPO से जुटाए गए फंड का उपयोग कंपनी के वर्किंग कैपिटल और कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। इसके जरिए कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना चाहती है।
कंपनी ने IPO के लिए प्राइस बैंड ₹279-₹294 प्रति शेयर तय किया है। निवेशक एक लॉट में अधिकतम 50 शेयरों की बोली लगा सकते हैं।
डेंटा वॉटर के आईपीओ का GMP पहले दिन से ही चर्चा में है। शुरुआती दिनों में यह ₹45 था, जो अब बढ़कर ₹165 हो गया है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले 56% प्रीमियम दर्शाता है। यह बढ़ता GMP निवेशकों के उत्साह को दिखाता है।
विश्लेषकों ने निवेशकों को इस IPO में लंबी अवधि के लिए निवेश करने की सलाह दी है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) अनुपात 13.14x और EV/EBITDA 9.13x है। पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप ₹785 मिलियन और रिटर्न ऑन नेट वर्थ 36.36% है। कंपनी का बिजनेस मॉडल और ऑर्डर बुक मजबूत है, इसलिए हम इसे ‘सब्सक्राइब-लॉन्ग टर्म’ की सलाह देते हैं।
साल 2016 में स्थापित डेंटा वॉटर और इंफ्रा सॉल्यूशंस देश में वॉटर इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) सेवाओं में प्रमुख खिलाड़ियों में से एक बनकर उभरा है। कंपनी का काम जल प्रबंधन और रीसाइक्लिंग तकनीकों के जरिए बढ़ती जल समस्याओं का समाधान करना है। कंपनी ने कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं, जिनमें बाय्रापुरा और हीरमगलूर LIS प्रोजेक्ट, करागाडा LIS प्रोजेक्ट शामिल हैं। ये सभी प्रोजेक्ट मुख्य रूप से लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम्स के जरिए किए गए हैं।
डेंटा वॉटर IPO का शेयर आवंटन 27 जनवरी को फाइनल होने की उम्मीद है, जबकि इसका लिस्टिंग 29 जनवरी को होने की संभावना है।
डेंटा वॉटर कंपनी ने बेंगलुरु के जल प्रबंधन में बड़ा योगदान दिया है। केसी वैली प्रोजेक्ट के पहले चरण में कंपनी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे बेंगलुरु दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर बन गया जहां सबसे ज्यादा मात्रा में ट्रीटेड वेस्टवाटर का इस्तेमाल होता है।
Disclaimer: यह समाचार केवल जानकारी के उद्देश्य से है। कृपया निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।