Retirement Planning: एक्सपर्ट के अनुसार रिटायरमेंट के लिए कम से कम मासिक खर्च का 300 गुना फंड होना चाहिए। यानी अभी 1 लाख रुपये मंथली खर्चा है, तो 3.5 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट कॉर्पस।
Retirement Planning: ज्यादातर लोगों की रिटायरमेंट प्लानिंग पुरानी हो चुकी है और वे आज की वास्तविकताओं तथा भविष्य के खर्चों को ध्यान में नहीं रखतीं। यह एक ऐसा रिटायरमेंट है, जो अब मौजूद ही नहीं है। सीए और फाइनेंशियल एडवाइजर नितिन कौशिक ने एक्स पर एक पोस्ट में यह बात कही है। कौशिक ने कहा कि समय बदल चुका है और लोगों का खर्च करने का तरीका भी बदल चुका है। लेकिन ज्यादातर लोग अब भी रिटायरमेंट की योजना पुराने तरीकों से ही बना रहे हैं। ये तरीके पहले सही साबित हुए थे, लेकिन अब बदलती परिस्थितियों में ये पर्याप्त नहीं रह गए हैं।
उन्होंने लिखा, 'ज्यादातर भारतीय ऐसे रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं जो अब मौजूद ही नहीं है। पारंपरिक नियम अब काम नहीं कर रहे, क्योंकि वे 2026 के दो बड़े खतरों को नजरअंदाज करते हैं- हेल्थकेयर महंगाई और लंबी उम्र।' कौशिक के मुताबिक अगर आप अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग 4% विड्रॉल रेट और 20 साल के रिटायरमेंट टाइम को ध्यान में रखकर कर रहे हैं, तो गणित के हिसाब से संभावना है कि 70 की उम्र तक आपका पैसा खत्म हो सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत में सामान्य महंगाई करीब 5% के आसपास है, लेकिन मेडिकल महंगाई 12 से 14% तक पहुंच चुकी है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, स्वास्थ्य पर खर्च भी बढ़ने लगता है। इसे उदाहरण से समझाते हुए उन्होंने कहा, 'अस्पताल में जिस बीमारी का इलाज आज 5 लाख रुपये में हो रहा है, उस के लिए 15 साल बाद लगभग 27 लाख रुपये खर्च होंगे। अगर आपके रिटायरमेंट फंड में कम से कम 25% मेडिकल बफर नहीं है, तो एक बड़ी बीमारी ही आपकी पूरी रिटायरमेंट प्लानिंग खत्म कर सकती है।'
कौशिक के अनुसार 2026 के लिए नया नियम यह होना चाहिए कि रिटायरमेंट के लिए कम से कम मासिक खर्च का 300 गुना फंड होना चाहिए। उन्होंने समझाया कि यदि 2026 में आपका मासिक खर्च 1 लाख रुपये है और आप उसी जीवनशैली को रिटायरमेंट के बाद बनाए रखना चाहते हैं, तो आपको कम से कम 3.5 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना होगा। इस कैलकुलेशन में रिटायरमेंट उम्र 60 वर्ष ली गई है। व्यक्ति की कुल उम्र 85 वर्ष मानी गई है। निवेश पर महंगाई से ऊपर लगभग 2% का वास्तविक रिटर्न माना गया है।
कौशिक का कहना है कि 4% विदड्रॉल नियम अमेरिकी बाजार के लिए बनाया गया था। भारत जैसे देश, जहां महंगाई ज्यादा है, वहां 3% विदड्रॉल रेट ज्यादा सुरक्षित माना जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, 'अगर आप 1 करोड़ रुपये के कॉर्पस से हर साल 4 लाख रुपये निकालते हैं, तो यह सुरक्षित लगता है। लेकिन 10 साल बाद वही 4 लाख रुपये आज के 2.2 लाख रुपये की क्रय शक्ति के बराबर रह जाएगा।'
कौशिक के अनुसार जिन मध्यम वर्गीय पेशेवरों के पास पारिवारिक संपत्ति का सपोर्ट नहीं है, उनके लिए लाइफस्टाइल आर्बिट्राज एक महत्वपूर्ण रणनीति हो सकती है। इसका मतलब है कि महंगे महानगरों से अपेक्षाकृत सस्ते शहरों में रहना। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति बेंगलुरु जैसे टियर-1 शहर से कोयंबटूर जैसे टियर-2 शहर में शिफ्ट हो जाता है, तो कम खर्च में समान या बेहतर जीवनशैली मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पता बदलने से ही आपका खर्च 40% तक कम हो सकता है, जिससे बिना अतिरिक्त बचत किए आपके निवेश की उम्र लगभग 10 साल बढ़ सकती है।
कौशिक के मुताबिक रिटायरमेंट प्लानिंग केवल कुल बचत पर नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद हर साल होने वाले खर्चों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'रिटायरमेंट में असली संपत्ति यह नहीं है कि पहले दिन आपके पास कितना पैसा है, बल्कि यह है कि आपकी मेडिकल जरूरतों को देखते हुए आपकी सेफ विदड्रॉल रेट (SWR) क्या है।'
उन्होंने कहा, '2026 के जीवनयापन के आंकड़ों को देखने के बाद सच्चाई साफ है- अगर आप 30 साल के रिटायरमेंट टाइम और डबल डिजिट की मेडिकल महंगाई को ध्यान में रखकर योजना नहीं बना रहे हैं, तो आप रिटायरमेंट की नहीं बल्कि एक आने वाले वित्तीय संकट की योजना बना रहे हैं।'