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डीजल की कीमतों का खेल: पेट्रोल पंप पर लाइन लगाकर बैठे हैं बड़े-बड़े थोक खरीदार, आखिर क्यों?

Bulk Diesel Rate: डीजल के थोक और रिटेल दामों में बड़े अंतर के कारण बड़े ग्राहक अब पेट्रोल पंप से सस्ता डीजल खरीद रहे हैं। इससे तेल कंपनियों की थोक बिक्री 30-50% तक गिर गई है।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Apr 30, 2026

Diesel Price

डीजल की थोक और रिटेल कीमतों में बड़ा अंतर है। (PC: AI)

Diesel Price: डीजल के दामों में ऐसा फर्क आया है कि बड़े-बड़े खरीदार भी अब सीधे पेट्रोल पंप की लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि रिटेल पर डीजल सस्ता है, जबकि थोक में महंगा। ऐसे में तेल कंपनियों की मुश्किल बढ़ गई है। तेल कंपनियों की थोक डीजल बिक्री में 30% से 50% तक की गिरावट आ चुकी है। फैक्ट्रियां, खदानें और सड़क निर्माण से जुड़े बड़े ग्राहक अब थोक के बजाय रिटेल पंप से डीजल खरीद रहे हैं।

कैसे आया यह बदलाव?

ईरान युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसके चलते कंपनियों ने बड़े ग्राहकों के लिए डीजल के दाम बढ़ा दिए, ताकि ग्लोबल कीमतों के साथ तालमेल बैठाया जा सके। लेकिन दूसरी तरफ आम पेट्रोल पंप पर मिलने वाले डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए। यही वजह है कि अब दोनों के बीच बड़ा अंतर बन गया है।

कितना है कीमतों में फर्क?

दिल्ली में थोक डीजल करीब 134.5 रुपये प्रति लीटर है। जबकि पंप पर वही डीजल 87.6 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। यानी करीब 47 रुपये का सीधा फर्क है। कुछ जगह यह अंतर 52 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

कंपनियों के लिए मुश्किल

रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाने के कारण तेल कंपनियों को हर लीटर पर नुकसान हो रहा है। पहले जो डीजल थोक में महंगे दाम पर बिकता था, अब वही सस्ता बेचने की नौबत आ गई है। यानी नुकसान सिर्फ बढ़ नहीं रहा, बल्कि फैल भी रहा है। छोटे उद्योग, माइनिंग कंपनियां, सड़क ठेकेदार और मछुआरे अब तेजी से रिटेल पंप की ओर जा रहे हैं। हालांकि, डिफेंस और रेलवे जैसे बड़े संस्थान अभी भी थोक चैनल से ही डीजल खरीद रहे हैं।

पहले भी हो चुका है ऐसा

2022 में यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ऐसा ही हुआ था। तब भी थोक ग्राहक सस्ते रिटेल डीजल की ओर चले गए थे, जिससे कंपनियों का थोक बिजनेस प्रभावित हुआ था।