
पाकिस्तान में तेल संकट गहरा रहा है। (PC: AI)
Pakistan oil crisis: तेल की मार ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे हैं कि देश के पास कुछ दिनों का ही कच्चा तेल बचा है। ऊपर से आयात बिल आसमान छू रहा है। वहीं, दूसरी तरफ भारत है, जहां इतनी उथल-पुथल के बीच भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेल की सप्लाई ठप होने लगी है और सरकार के पास ज्यादा विकल्प भी नहीं हैं। खुद पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली मलिक ने माना है कि उनका देश इस मामले में भारत से बहुत पीछे है।
अली मलिक के मुताबिक, पाकिस्तान के पास रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व नाम की कोई ठोस व्यवस्था ही नहीं है। देश के पास सिर्फ 5-7 दिन का कच्चा तेल बचा है। रिफाइंड फ्यूल का स्टॉक भी सिर्फ 20-21 दिन का है। एक दिन का भी मजबूत बैकअप नहीं है। यानी अगर सप्लाई और बिगड़ी, तो हालात बुरी तरह खराब हो सकते हैं। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मिनिस्टर ने कहा, 'हम भारत नहीं हैं जो एक हस्ताक्षर के साथ तेल सुरक्षित कर लें।'
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद माना है कि हालात गंभीर हैं। तेल बिल बुरी तरह बढ़ गया है। शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान का तेल आयात बिल 1 हफ्ते में ही करीब तीन गुना बढ़ गया है। पहले हर हफ्ते करीब 300 मिलियन डॉलर का तेल आयात होता था, लेकिन अब यह बढ़कर 800 मिलियन डॉलर हो गया है।
अली मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा, “भारत के पास ना सिर्फ 600 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, बल्कि वे पेट्रोल का स्ट्रेटेजिक रिजर्व भी रखते हैं। इससे उन्हें इस संकट से निपटने में मदद मिलती है। साथ ही, वे आईएमएफ कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं और तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के दौरान उन्होंने करों में कटौती करके खुद को संकट से बचाने की कोशिश की… उनके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं।”
अब सवाल यही है कि जब दुनिया भर में तेल महंगा हो रहा है, तो भारत में कीमतें क्यों नहीं बढ़ीं? इसका जवाब भारत की तैयारी में छिपा है:
मजबूत तेल भंडार : भारत ने पहले से ही आपात स्थिति के लिए बड़ा स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व बना रखा है।
अलग-अलग देशों से आयात: भारत ने सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर रहना छोड़ दिया है। रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदा जा रहा है और वेनेजुएला से भी सप्लाई शुरू हो चुकी है।
आर्थिक ताकत: भारत के पास बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे झटकों को संभालना आसान हो जाता है।
पाकिस्तान की स्थिति इसलिए भी कठिन है क्योंकि वह IMF के कर्ज और शर्तों से बंधा हुआ है। सरकार को टैक्स बढ़ाने और सब्सिडी कम करने जैसे फैसले लेने पड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि पेट्रोल और डीजल पर टैक्स का बोझ इधर-उधर करके नुकसान संभालने की कोशिश की जा रही है।
Updated on:
30 Apr 2026 04:52 pm
Published on:
30 Apr 2026 04:52 pm
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