इकोनॉमिक सर्वे 2026 भारत की अर्थव्यवस्था का वार्षिक विश्लेषण है, जिसे 29 जनवरी 2026 को संसद में पेश किया जाएगा। यह रिपोर्ट बजट से पहले आर्थिक हालात, चुनौतियों और अवसरों की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करती है।
Budget 2026 Economic Survey Date: भारत में हर साल बजट से पहले देश की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज पेश किया जाता है, जिसे इकोनॉमिक सर्वे कहा जाता है। यह रिपोर्ट बीते वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें विकास दर, महंगाई, रोजगार, निवेश और सरकारी नीतियों का आकलन शामिल होता है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 इस साल संसद में 29 जनवरी 2026 को पेश किया जाना तय माना जा रहा है, जो यूनियन बजट 2026 से ठीक पहले आएगा और बजट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इकोनॉमिक सर्वे भारत सरकार की एक वार्षिक रिपोर्ट होती है, जिसे वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक कार्य विभाग द्वारा तैयार किया जाता है। इसका नेतृत्व चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की टीम करती है। इस रिपोर्ट में देश की समग्र आर्थिक स्थिति, सेक्टर-वाइज प्रदर्शन, वैश्विक चुनौतियां और घरेलू अवसरों का विश्लेषण होता है। यह कोई नीतिगत घोषणा नहीं होती, बल्कि तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई विश्लेषणात्मक रिपोर्ट होती है, जो सरकार और नीति निर्माताओं को ठोस निर्णय लेने में मदद करती है।
इकोनॉमिक सर्वे 2026 में भारत की जीडीपी ग्रोथ, महंगाई दर, रोजगार सृजन, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, सर्विस सेक्टर और एक्सपोर्ट जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट, स्टार्टअप इकोसिस्टम, फिनटेक, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश जैसे नए उभरते क्षेत्रों का भी विस्तृत उल्लेख किया जाएगा। वैश्विक आर्थिक हालात, जियो-पॉलिटिकल तनाव और उनका भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर भी सर्वे का अहम हिस्सा रहेगा।
इकोनॉमिक सर्वे को बजट का रोडमैप कहा जाता है, क्योंकि यह आने वाले यूनियन बजट के लिए आधार तैयार करता है। बजट में टैक्स, खर्च और योजनाओं से जुड़े फैसले काफी हद तक इसी सर्वे के आंकड़ों और विश्लेषण पर निर्भर करते हैं। निवेशक, उद्योग जगत, अर्थशास्त्री और आम नागरिक सभी इकोनॉमिक सर्वे का अध्ययन कर सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं को समझते हैं। यही कारण है कि बजट से पहले इस रिपोर्ट पर खास नजर रहती है।