फिक्स्ड डिपोजिट (Fixed Deposit) पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है, जो एफडी पर मिलने वाले रिटर्न के फायदे को कम कर देता है।
नई दिल्ली। आम भारतीय नागरिक फिक्स्ड डिपोजिट (FD) को इन्वेस्टमेंट के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प मानता है। विशेषकर सीनियर सीटिजन्स जो इस बात की सबसे ज्यादा परवाह करते हैं कि उनका पैसा सुरक्षित रहे और उस पर अधिकतम संभव ब्याज भी मिल सके। ऐसे में वे अपने पैसे की एफडी करवाने को पहली प्राथमिकता देते हैं। हालांकि पिछले कुछ समय से फिक्स्ड डिपोजिट पर लगातार ब्याज कम होता जा रहा है। मार्केट को देखें तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले एक वर्ष में रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं किया है। वर्तमान में अभी चार फीसदी की दर चल रही है। इसके बावजूद अधिकतर बैंकों ने हाल के दिनों में एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों में कटौती की है।
फिलहाल अलग-अलग बैंकों में एफडी पर अलग-अलग ब्याज दिया जा रहा है। इनकी दरें निम्न प्रकार हैं-
बैंक - ब्याज दर (%)
एक्सिस बैंक - 4.40 से 5.75 प्रतिशत
डीबीएस बैंक - 5.70 से 6.50 प्रतिशत
फेडरल बैंक - 4.40 से 5.60 प्रतिशत
इंडसइंड बैंक - 5.50 से 6.50 प्रतिशत
एचडीएफसी बैंक - 3.00 से 6.25 प्रतिशत
आइडीबीआइ बैंक - 3.00 से 5.75 प्रतिशत
आइडीएफसी बैंक - 5.25 से 6.00 प्रतिशत
करूर वैश्य बैंक - 4.25 से 6.00 प्रतिशत
पीएनबी बैंक - 3.85 से 6.02 प्रतिशत
आरबीएल बैंक - 5.40 से 6.50 प्रतिशत
सा. इंडियन बैंक - 4.50 से 5.65 प्रतिशत
एसबीआई बैंक - 3.90 से 5.60 प्रतिशत
टीएनएससी बैंक - 5.75 से 6.00 प्रतिशत
यस बैंक - 5.25 से 6.50 प्रतिशत
एफडी के ब्याज पर भी लगता है टैक्स
फिक्स्ड डिपोजिट (Fixed Deposit) पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है, जो एफडी पर मिलने वाले रिटर्न के फायदे को कम कर देता है। यह टैक्स टीडीएस के रूप में जमा किया जाता है। कुल टीडीएस कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको कुल ब्याज कितना मिल रहा है। आम तौर पर इसमें 20 से 30 फीसदी तक टैक्स चुकाना होता है। यदि आप टैक्सेबल स्लैब में आ रहे हैं तो निश्चित रूप से आपको टैक्स जमा करवाना होगा।
ऐसे बचा सकते हैं ब्याज पर टैक्स
सबसे पहली बात यदि आपकी इनकम टैक्स लायक नहीं है और एफडी से मिलने वाला ब्याज भी बहुत कम है तो आपको इस पर टैक्स नहीं देना होगा परन्तु यदि ब्याज ज्यादा मिल रहा है तो फिर आपको फाइनेंशियल एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए। आप चाहें तो एक ही बड़ी एफडी करवाने के बजाय घर के सदस्यों के नाम से अलग-अलग एफडी करवाकर भी ब्याज बचा सकते हैं।