वर्ष 2026-27 से कंपनी अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 नहीं देगी, इसके बदले फॉर्म 130 मिलेगा। फॉर्म 16 में सैलरी, काटे और जमा किए गए टैक्स और डिडक्शन की जानकारी होती है।
Income Tax Act 2025: देश में 1 अप्रेल से इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू हो जाएगा। इसके तहत आईटीआर फॉम्र्स की नंबरिंग पूरी तरह बदल जाएगी। आईटीआर फॉम्र्स को भी नए सिरे से बनाया गया है। इसका मकसद आईटीआर फाइलिंग को आसान बनाना, कन्फ्यूजन घटाना और कंप्लायंस को ज्यादा व्यवस्थित करना है। नए एक्ट में टैक्स फाइल करने का तरीका पहले से ज्यादा डिजिटल, ज्यादा डिटेल्ड और ज्यादा डिसिप्लिन्ड होने वाला है।
वर्ष 2026-27 से कंपनी अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 नहीं देगी, इसके बदले फॉर्म 130 मिलेगा। फॉर्म 16 में सैलरी, काटे और जमा किए गए टैक्स और डिडक्शन की जानकारी होती है। इसे टीडीएस सर्टिफिकेट भी कहा जाता है। कंपनियों के लिए फॉर्म 16 हर वित्त वर्ष में 15 जून तक जारी करना अनिवार्य होता है। लेकिन इस बार फॉर्म 16 के बदले फॉर्म 130 मिल सकता है। फॉर्म 16 ही नहीं, लगभग सभी आईटीआर फॉम्र्स में बदलाव किए गए हैं।
कम या शून्य टीडीएस आवेदन: फॉर्म 128 बन जाएंगे
सैलरी टीडीएस सर्टिफिकेट यानी फॉर्म 16: फॉर्म 130 बनेंगे
फॉर्म 16 ए: फॉर्म 131 बन जाएंगे।
24क्यू होगा फॉर्म 138 (सैलरी)
26क्यू होगा फॉर्म 140 (रेजिडेंट्स)
27क्यू फॉर्म 144 (नॉन-रेजिडेंट्स)
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट : अभी के फॉर्म 3सीए, 3सीबी, 3सीडी मिलकर फॉर्म 26 बनेंगे।
ट्रांसफर प्राइसिंग ऑडिट : फॉर्म 3 सीईबी अब फॉर्म 48 बनेगा।
मैट सर्टिफिकेशन : फॉर्म 29बी फॉर्म 66 के नाम से जाना जाएगा।
टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट : फॉर्म 10एफए बदलकर फॉर्म 42 बनेगा।
डीटीएए डिस्क्लोजर : फॉर्म 10एफ बदलकर फॉर्म 41 हो जाएगा।
1 सालाना टैक्स स्टेटमेंट 26एएस: अब फॉर्म 168 के नाम से जाना जाएगा।
2 स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस 61ए: यह फॉर्म 165 होगा।
3 विदेशी रेमिटेंस डिक्लेरेशन 15सीए: यह बदलकर फॉर्म 145 बनेगा।
4 सीए सर्टिफिकेट फॉर रेमिटेंस 15सीबी: फॉर्म 146 के नाम से बदलेगा।
ये उन लोगों के लिए है जो सैलरी, एक घर की प्रॉपर्टी और इंटरेस्ट जैसी दूसरी इनकम से कमाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग डिफॉल्ट हो गई है। पेपर फाइलिंग सिर्फ सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए है।
उन लोगों और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिलीज (एचयूएफ) के लिए है जिनके पास बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम नहीं है। इसमें कैपिटल गेन, कई घरों की प्रॉपर्टी या विदेश से आय वाले लोग आते हैं। डिस्क्लोजर्स (खुलासा) ज्यादा डिटेल्ड होने वाले हैं। जो लोग निवेश करते हैं या विदेश से कमाते हैं, उन्हें अब ज्यादा जानकारी देनी पड़ेगी।
उन लोगों के लिए जिनकी कमाई बिजनेस या प्रोफेशन से होती है। अगर कोई टैक्सपेयर प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन या आसान रिटर्न के दायरे में नहीं आता, तो उसे आईटीआर-3 ही भरना होगा। नए नियमों में पक्र्विजिट्स, कैपिटल गेंस और खास तरह की इनकम पर ज्यादा फोकस किया गया है। यानी पहले से ज्यादा जानकारी देनी पड़ेगी।
प्रेसम्प्टिव टैक्सेशन वाले मामलों के लिए रहेगा। अगर आपके पास विदेश में कोई एसेट या इनकम है, किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, अनलिस्टेड शेयर रखते हैं, सालाना कमाई 50 लाख रुपए से ज्यादा है, दो से अधिक घर हैं, पिछला नुकसान आगे बढ़ाया गया है या खेती से कमाई 5,000 रुपए से ऊपर है, तो आईटीआर-4 नहीं भर पाएंगे। ऐसे लोगों को आईटीआर-3 भरना होगा।
नए ड्राफ्ट नियमों में डिजिटल कंप्लायंस, ऑडिट से जुड़ी जानकारी और रिपोर्टिंग की शर्तों को और सख्त किया गया है। कंपनियों के लिए डिजिटल सिग्नेचर से रिटर्न फाइल करना जरूरी रहेगा। आईटीआर 7 में अब ऑडिट रिपोर्ट, डोनेशन की जानकारी और फंड्स के इस्तेमाल को सीधे रिटर्न से जोड़ा जाएगा।यानी ट्रस्ट्स और संस्थाओं को पहले से कहीं ज्यादा जवाबदेह रहना होगा।