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Income Tax: प्रॉपर्टी में हुए घाटे को टैक्स बचाने के लिए कर सकते हैं इस्तेमाल, ITR भरते समय इस प्रोसेस का रखें ध्यान

Capital Loss Set Off Income Tax: प्रॉपर्टी बेचने पर हुए घाटे को इनकम टैक्स के जरिए रिकवर किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है समय पर ITR फाइल करना और कुछ बातों का ध्यान रखना।

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Capital Loss Set Off Income Tax

कैपिटल लॉस से इनकम टैक्स भी बचा सकते हैं। (PC: Pexels)

ITR filing 2026: कई बार जल्दबाजी में की गई बिक्री या कमजोर रियल एस्टेट बाजार की वजह से मकान, प्लॉट या कमर्शियल प्रॉपर्टी को खरीदी गई कीमत से कम पर बेचना पड़ जाता है। ऐसे में प्रॉपर्टी बेचने पर नुकसान उठाना पड़ता है। इस नुकसान को आप टैक्स बचाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।। इसके लिए इनकम टैक्स भरते समय कुछ जानकरियां सही से भरनी होती है। यह जानना जरूरी है कि इनकम टैक्स के नियमों के तहत इस घाटे को कैपिटल लॉस माना जाता है और इसे टैक्स बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस में फर्क समझें

इनकम टैक्स एक्ट के तहत प्रॉपर्टी से हुए नुकसान को दो हिस्सों में बांटा जाता है, शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस और लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस। यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी को कितने समय तक अपने पास रखा गया था। विभावंगल अनुकुलाकारा प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्या के अनुसार प्रॉपर्टी बेचकर होने वाले कैपिटल लॉस को सैलरी, बिजनेस इनकम या ब्याज से होने वाली आय के साथ सेट ऑफ नहीं किया जा सकता। साथ ही रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों तरह की प्रॉपर्टी पर एक जैसे कैपिटल लॉस के नियम लागू होते हैं।

शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस को किसी भी कैपिटल गेन से सेट ऑफ किया जा सकता है, चाहे वह इक्विटी, म्यूचुअल फंड, गोल्ड या किसी दूसरी प्रॉपर्टी से हुआ हो। लेकिन लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस को केवल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन से ही सेट ऑफ किया जा सकता है। यह सेट ऑफ गोल्ड, डेट म्यूचुअल फंड, दूसरी प्रॉपर्टी और सेक्शन 112A के तहत टैक्स लगने वाले लिस्टेड शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड के लॉन्ग-टर्म गेन पर भी लागू होता है।

ITR में इन बातों को शामिल करना जरूरी

प्रॉपर्टी से हुए कैपिटल लॉस को ITR-2 या ITR-3 फॉर्म में Schedule CG सेक्शन के तहत भरना होता है। सैलरीड व्यक्ति या पेंशनर आमतौर पर ITR-2 भरते हैं, जबकि बिजनेस इनकम वाले ITR-3 का इस्तेमाल करते हैं। सिद्धार्थ मौर्या का कहना है कि AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary) दोनों का डेटा मेल न खाने पर इनकम टैक्स विभाग नोटिस भेज सकता है। इसके साथ ही कई बातों को स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है जैसे कि संपत्ति खरीदने और बेचने की तारिखें, स्टांप फीस, प्रॉपर्टी ट्रांसफर फीस या प्रॉपर्टी में किए गए सुधार में होने वाला खर्च। साथ ही प्रॉपर्टी खरीदने वाले का PAN नंबर भी बताना होता है।

पर्याप्त कैपिटल गेन नहीं होने पर क्या करें?

अगर किसी टैक्सपेयर के पास उसी वित्त वर्ष में पर्याप्त कैपिटल गेन नहीं है, तो यह अनएडजस्टेड कैपिटल लॉस आगे के सालों में कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है। हालांकि, इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(1) के तहत समय पर ITR दाखिल करना अनिवार्य है। अगर रिटर्न देर से भरा गया तो यह लाभ पूरी तरह खत्म हो जाता है।