New Labour Code: नए लेबर कोड के तहत कंपनियां 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी वाला विकल्प लागू कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए कर्मचारियों को रोज करीब 12 घंटे काम करना पड़ सकता है।
Four Day Work Week: नए लेबर कोड के तहत कंपनियों को यह छूट दी गई है कि वे चाहें तो कर्मचारियों के लिए हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी वाला वर्कवीक मॉडल लागू कर सकती हैं। लेकिन इसमें एक बड़ा पेंच भी है। छुट्टी ज्यादा मिलेगी, तो काम के घंटे भी बढ़ जाएंगे। सरकार की तरफ से जारी नए ‘कोड ऑन वेजेज’ नियमों में साफ कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी से एक हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता। यानी अगर कोई कंपनी सिर्फ चार दिन काम करवाना चाहती है, तो उसे बाकी दिनों में काम के घंटे बढ़ाने होंगे।
सीधी भाषा में समझें तो चार दिन की नौकरी का मतलब होगा रोज करीब 12 घंटे ऑफिस। हालांकि, इसमें ब्रेक और आराम का समय भी शामिल रहेगा। यानी तीन दिन की छुट्टी मुफ्त में नहीं मिलने वाली। कर्मचारियों को लंबे वर्किंग आवर्स के लिए तैयार रहना पड़ेगा।
सबसे अहम बात यह है कि कंपनी अपनी मर्जी से यह नियम लागू नहीं कर सकती। कर्मचारी की सहमति जरूरी होगी। अगर कर्मचारी 12 घंटे की शिफ्ट के लिए तैयार नहीं है, तो उस पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह कोई अनिवार्य नियम नहीं है। कंपनियों को सिर्फ एक विकल्प दिया गया है, ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से काम का ढांचा तय कर सकें।
अगर कोई कर्मचारी तय 12 घंटे से ज्यादा काम करता है या चार दिन की तय सीमा से ऊपर काम कराया जाता है, तो कंपनी को ओवरटाइम देना होगा। यह भुगतान सामान्य वेतन से दोगुनी दर पर करना पड़ेगा। यानी कंपनियों के लिए भी यह मॉडल उतना आसान नहीं होगा, जितना पहली नजर में दिखता है।
आईटी, डिजिटल मार्केटिंग, डिजाइनिंग, आईटीईएस और दूसरे ऑफिस बेस्ड सेक्टर्स में यह व्यवस्था आसानी से लागू हो सकती है। जहां ज्यादातर काम लैपटॉप और इंटरनेट पर होता है, वहां कंपनियां कर्मचारियों को लचीलापन देने पर विचार कर सकती हैं। इसके अलावा कई स्टार्टअप और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भी इस मॉडल को अपनाने में दिलचस्पी दिखा सकते हैं। आजकल युवा कर्मचारियों में ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ की डिमांड तेजी से बढ़ रही है और कंपनियां भी टैलेंट रोकने के लिए नए तरीके ढूंढ रही हैं।
हालांकि, अस्पताल, फैक्ट्री, होटल, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रिटेल जैसे सेक्टर्स में चार दिन वाला मॉडल लागू करना आसान नहीं माना जा रहा। इन जगहों पर लगातार काम चलता है और कर्मचारियों की शिफ्ट पहले से ही चुनौतीपूर्ण होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई उद्योगों में 12 घंटे की लंबी ड्यूटी कर्मचारियों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। खासकर वहां, जहां शारीरिक मेहनत ज्यादा होती है।
अगर किसी कंपनी के दफ्तर एक से ज्यादा राज्यों में हैं, तो उस पर केंद्र सरकार के लेबर नियम लागू होंगे। हालांकि, राज्यों के अपने श्रम कानून भी कई मामलों में असर डाल सकते हैं। इसलिए कंपनियों को नया सिस्टम लागू करने से पहले कानूनी पहलुओं को भी समझना होगा।
फिलहाल इतना तय है कि आने वाले समय में भारत का वर्क कल्चर बदलने की तैयारी में है। लेकिन चार दिन काम और तीन दिन छुट्टी सुनने में जितना आसान लगता है, जमीन पर मामला उतना सीधा नहीं है। कर्मचारियों को छुट्टी ज्यादा मिलेगी, लेकिन बदले में लंबे घंटे तक काम भी करना पड़ सकता है