Share Market: अब छोटे निवेशकों को 30 से ज्यादा इंटरनेशनल मार्केट्स तक पहुंच मिल सकेगी। NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज ने ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
Share Market: भारत के करोड़ों छोटे निवेशकों के लिए ग्लोबल शेयर बाजार में निवेश करना अब पहले से कहीं आसान होने वाला है। एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज ने ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए अगले छह माह में 30 से ज्यादा इंटरनेशनल मार्केट्स तक पहुंच मिलेगी। पहले चरण में शुरुआत अमरीकी शेयर बाजार से हो चुकी है। अब छोटे निवेशक एपल-गूगल-टेस्ला जैसे अमेरीकी शेयरों में सीधे निवेश कर सकेंगे।
अभी खुदरा निवेशकों को विदेशी ब्रोकर्स या म्यूचुअल फंड (फंड ऑफ फंड्स) यानी एफओएफ के जरिए विदेशी शेयर में निवेश करना पड़ रहा था। फ्रैक्शनल खरीदारी भी संभवत: ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म की सबसे खास सुविधा फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग है। यानी अगर किसी अमरीकी शेयर की कीमत 250-300 डॉलर है, तो भी निवेशक पूरा शेयर खरीदने के बजाय 5 या 10 डॉलर जितनी छोटी रकम से उसका हिस्सा खरीद सकते हैं। इससे छोटे निवेशकों के लिए हाई-वैल्यू टेक शेयरों में एंट्री आसान हो जाएगी।
यह पूरी व्यवस्था आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत होगी। इस स्कीम के अनुसार, कोई भी भारतीय निवासी एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख अमरीकी डॉलर तक विदेश भेज सकता है। निवेश, इसी सीमा और नियामकीय ढांचे के भीतर होगा। एनएसई आइएक्स के सीईओ वी बालासुब्रमण्यम ने कहा, ऑनबोर्डिंग से लेकर ट्रेडिंग तक की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार बनाई गई है। निवेश पूरी तरह वैध और आरबीआई फ्रेमवर्क के भीतर होगा।
फिलहाल प्लेटफॉर्म पर इक्विटी और ईटीएफ में निवेश की अनुमति होगी। डेरिवेटिव्स, क्रिप्टोकरेंसी या डिजिटल एसेट्स में निवेश की सुविधा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि एलआरएस नियमों के तहत इसकी इजाजत नहीं है। आगे चलकर संस्थागत निवेशकों के लिए भी इस प्लेटफॉर्म को खोला जा सकता है, जिससे म्यूचुअल फंड और बड़े निवेशक भी ग्लोबल मार्केट्स में सीधे ट्रेड कर सकेंगे।
एनएसई ने वेब और मोबाइल ऐप शुरू किया है। इस पर निवेशकों को अकाउंट खोलना होगा। अकाउंट खोलने से लेकर ट्रेडिंग तक की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। आधार, पैन और डिजिलॉकर के जरिए 30 से 45 सेकंड में केवाइसी पूरी की जा सकती है। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद निवेशक गिफ्ट सिटी में तय बैंक खाते में पैसा भेज सकते हैं, जो ट्रेडिंग सिस्टम से जुड़ा होगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए किया जाने वाला निवेश अमरीकी डॉलर में होगा। निवेशक रुपए को डॉलर में रेमिट कर गिफ्ट सिटी के बैंक अकाउंट में भेजेंगे, जिसके बाद ऐप पर ट्रेडिंग लिमिट दिखाई देगी और वे खरीद-बिक्री शुरू कर सकेंगे।