कारोबार

Success Story: शेड के नीचे 2 कर्मचारियों से शुरुआत; खड़ी कर दी ₹68,000 करोड़ की कंपनी, ये हैं Megha Engineering के फाउंडर पी पी रेड्डी

पी पी रेड्डी की कहानी लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो अभावों में पले बढ़े लेकिन सपने काफी बड़े देखते हैं।
3 min read
Jan 04, 2026
Feature image
पी पी रेड्डी ने मेघा इंजीनियरिंग की शुरुआत की (PC: AI generated)

हर सफलता के पीछे होती है अटूट मेहनत, ज़िद और आंखों में कुछ बड़ा करने का सपना। ऐसी ही कहानी है पमिरेड्डी पिची रेड्डी (पी पी रेड्डी) की, जिन्होंने मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Megha Engineering) की नींव रखी। जिनकी गिनती देश के सबसे सफर इंफ्रास्ट्रक्चर टायकूंस में होती है। लेकिन इस ऊंचाई तक पहुंचने के लिए पी पी रेड्डी को संघर्ष के कंटीले रास्तों से गुजरना पड़ा। पी पी रेड्डी Reddy) की कहानी उन चुनिंदा कारोबारियों में होती है, जिन्होंने बिना किसी बड़े कारोबारी खानदान, बिना शेयर बाजार की चमक और बिना ग्लैमर के, जमीन से उठकर एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर साम्राज्य खड़ा किया।

कंपनी खोलने के लिए 5 लाख का किया इंतजाम

पी पी रेड्डी 1957 में आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना क्षेत्र) के कृष्णा जिले के छोटे से गांव डोकिपर्रू में एक गरीब किसान परिवार में पैदा हुए। छह भाई-बहनों में वो पांचवें नंबर पर थे। परिवार का गुजारा खेती से मिलने वाली आय से होता था। कई किलोमीटर दूर वो पढ़ने के लिए स्कूल जाते थे, पढ़ाई में वो काफी अच्छे थे, इसलिए गरीबी के बावजूद उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन पढ़ाई पूरी करते वक्त उनके पास न तो कोई बड़ा नेटवर्क था और न ही शुरुआती पूंजी। इसलिए शुरू में उन्होंने छोटे-मोटे काम किए।

1980 के दशक में हैदराबाद आकर छोटे ठेकों में काम किया। जो उस समय जोखिम भरा माना जाता था। 1980 के दशक के अंत में भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर अभी संगठित नहीं था और बड़े प्रोजेक्ट्स पर गिने-चुने सरकारी ठेकेदारों का कब्जा हुआ करता था। मगर,उन्होंने हार नहीं मानी, कुछ करने का जज़्बा था, इसलिए 1989 में, सिर्फ 32 साल की उम्र में, 5 लाख रुपये का इंतजाम किया, जिसमें कुछ अपनी सेविंग्स थीं कुछ उधार लिया और शुरू कर दी एक कंपनी।

2 कर्मचारियों के साथ शुरू की कंपनी

हैदराबाद के बालानगर में एक छोटे शेड से सिर्फ 2 कर्मचारियों के साथ मिलकर उन्होंने मेघा इंजीनियरिंग एंटरप्राइजेज की शुरुआत की. एक टीन शेड के नीचे उन्होंने देश के एक सफल बिजनेस की नींव का बीज रोपा था। 1991 में उनके भतीजे पी वी कृष्णा रेड्डी ने चाचा का हाथ थामा और जुट गए कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में। शुरुआत में नगरपालिकाओं के लिए पानी की पाइप्स बनाते थे, कई सालों तक कंपनी सिंचाई नहरों, छोटे पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स और जल आपूर्ति से जुड़े काम करती थी। उस दौर में मेघा इंजीनियरिंग बड़े ठेके नहीं मिलते थे.

शुरू में ऑर्डर्स कम मिलते, पेमेंट में देरी होती, कॉम्पिटिशन भी बहुत ज्यादा बढ़ गया था, लेकिन रेड्डी इस बात से निराश नहीं हुए, उन्होंने सिर्फ एक बात पर फोकस किया, काम समय पर और पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा करना। यही उनकी पहचान बनी। धीरे-धीरे सरकारी विभागों में यह बात फैलने लगी कि यह कंपनी मुश्किल प्रोजेक्ट्स को भी समय पर पूरा कर देती है, फिर क्या था कंपनी का भरोसा कायम होने लगा।

पी पी रेड्डी ने खेला बड़ा दांव

1990 के दशक में रेड्डी ने इरिगेशन प्रोजेक्ट्स में एंट्री की, तब बड़े ठेके जीतना मुश्किल था। 1990 के दशक के आखिर और 2000 के शुरुआती वर्षों में भारत में सिंचाई और जल प्रबंधन पर सरकारी खर्च बढ़ने लगा था। ये बात पी पी रेड्डी को एक मौके के तौर पर दिखी। उन्होंने सोचा कि इस मौके का फायदा उठाया जाना चाहिए, इसके लिए कुछ अलग करना होगा। पी पी रेड्डी ने पारंपरिक ठेकेदारों से अलग सोचते हुए लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की। ये तकनीकी रूप से जटिल और बहुत सारी पूंजी वाला सेक्टर था, जिसमें बहुत कम निजी कंपनियां उतरने का हिम्मत रखती थीं. MEIL ने अपने इंजीनियरिंग स्किल और मशीनरी पर भारी निवेश किया और धीरे-धीरे बड़े राज्यों के मेगा प्रोजेक्ट्स में जगह बनानी शुरू कर दी।

जब आया टर्निंग प्वाइंट

मेघा इंजीनियरिंग के लिए टर्निंग पॉइंट तब आया जब तेलंगाना में कालेश्वरम लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट शुरू हुआ। यह दुनिया के सबसे बड़े लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है। MEIL को इसमें बड़ी जिम्मेदारी मिली। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ तकनीकी रूप से बेहद कठिन था, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव भी जबरदस्त था। लेकिन MEIL ने भारी मशीनरी, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और अपने इंजीनियरिंग कौशल के दम पर खुद को साबित किया। इसी एक प्रोजेक्ट ने पी पी रेड्डी और MEIL को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर नक्शे पर पहचान दिलाई।

कालेश्वरम के बाद MEIL सिर्फ सिंचाई कंपनी नहीं रही थी। कंपनी ने तेल और गैस पाइपलाइंस, पावर प्रोजेक्ट्स, रिफाइनरीज़, सड़कें, मेट्रो और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर में कदम रखा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि MEIL ने डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में भी एंट्री की और मिसाइल लॉन्च सिस्टम्स और डिफेंस इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग तक पहुंच बनाई। जो आमतौर पर सरकारी या PSU कंपनियों का क्षेत्र माना जाता है।

78,000 करोड़ रुपये की वैल्युएशन

पिछले साल ही मेघा इंजीनियरिंग ने भारत का पहला प्राइवेटली ऑपरेटेड स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बनाने और मैनेज करने का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। जिसकी वैल्यू 5,700 करोड़ रुपये है और अतिरिक्त क्रूड फिलिंग कॉस्ट अनुमानित $1.25 बिलियन (₹11,020 करोड़) है। देश की अब तक की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर पहल है जो एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए की गई है।

आज MEIL की गिनती भारत की सबसे बड़ी निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में होती है। इस कंपनी की वैल्युएशन 78,000 करोड़ रुपये के करीब है। पी पी रेड्डी देश के सबसे सफल इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रियलिस्ट में शुमार किए जाते हैं। लेकिन सादगी पसंद पी पी रेड्डी मीडिया की नजरों से दूर रहते हैं। अपने काम पर फोकस करते हैं।

Updated on:
04 Jan 2026 12:35 pm
Published on:
04 Jan 2026 12:31 pm
Also Read
View All
HFCL Share Price 8th September 2026: 6 महीने में 260% रिटर्न, क्या है शेयर में इस तेज उछाल की वजह? एक्सपर्ट ने बताया आगे क्या करें निवेशक

Samsung India Layoffs: सैमसंग ने भारत में शुरू की छंटनी, इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार की 25% मार्केटिंग टीम को लग सकता है झटका, जानिए क्या है वजह

Stock Market Today: बाजार खुलते ही 400 पॉइंट टूटा सेंसेक्स, रियल एस्टेट और IT स्टॉक्स गिरे, उधर मेटल शेयरों में दिखी तेजी

Vijay Kedia ने कैसे Neuland Laboratories के शेयर से लिया करीब 100 गुना रिटर्न, जानिए उनकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी

Gold न खरीदने की PM Modi की अपील क्या कर गई काम? अगस्त में भारत ने 30% कम मंगाया सोना, देखिए कैसे तेजी से बदले आंकड़े