Gold ETF Investment: सेबी ने गोल्ड ईटीएफ में बड़ा बदलाव किया है। अब फंड हाउस फिजिकल गोल्ड के साथ गोल्ड फ्यूचर्स में भी निवेश कर सकेंगे। इससे फंड मैनेजमेंट में लचीलापन बढ़ेगा, लेकिन निवेशकों के लिए कुछ नए जोखिम भी जुड़ेंगे।
Gold ETF Investment: सेबी ने गोल्ड ईटीएफ को नई सुविधा दी है कि फंड हाउस अब पोर्टफोलियो का एक हिस्सा गोल्ड डेरिवेटिव्स (गोल्ड फ्यूचर्स जैसे वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट्स) में भी निवेश कर सकते हैं। पहले गोल्ड ईटीएफ का पूरा पैसा फिजिकल सोने (बुलियन) में लगाया जाता था, जिससे निवेशकों को भरोसा रहता था कि निवेश सीधे सोने की कीमत से जुड़ा है। निवेश में अब फिजिकल गोल्ड और पेपर गोल्ड का मिश्रण होगा। हालांकि, गोल्ड ईटीएफ को अपने कुल निवेश का 95 फीसदी हिस्सा गोल्ड या गोल्ड से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में ही रखना होगा। फर्क यह है कि अब इसमें फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स भी शामिल होंगे।
एचडीएफसी एएमसी सबसे पहले 22 अप्रेल 2026 से अपने गोल्ड ईटीएफ में यह नया स्ट्रक्चर लागू करने जा रही है। गोल्ड ईटीएफ की कीमत अब भी सोने के दाम से जुड़ी रहेगी, लेकिन ट्रैकिंग का तरीका बदल सकता है। डेरिवेटिव्स के इस्तेमाल से फंड मैनेजर को ज्यादा लचीलापन मिलेगा। हालांकि, इसमें अतिरिक्त जोखिम और जटिलता भी जुड़ सकती है। गोल्ड फ्यूचर्स में फंड असली सोना नहीं खरीदता, बल्कि एक कॉन्ट्रैक्ट लेता है। यह कॉन्ट्रैक्ट तय करता है कि भविष्य में किसी खास तारीख पर एक निश्चित कीमत पर सोना खरीदा या बेचा जाएगा।