
Small Cap Stocks: शेयर बाजार में चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में तस्वीर काफी अलग रही है। जहां बड़े शेयरों में तेजी सीमित रही, वहीं स्मॉलकैप शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 23 फीसदी की तेजी आई। इसके मुकाबले निफ्टी मिडकैप 150 ने 13 फीसदी और निफ्टी 50 ने सिर्फ 2 फीसदी रिटर्न दिया। यानी छह महीने के दौरान स्मॉलकैप शेयरों ने बड़े शेयरों को 21 प्रतिशत अंक से पीछे छोड़ दिया। मिडकैप शेयरों की परफॉर्मेंस भी लार्जकैप से बेहतर रही।
H1 FY27 यानी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में इक्विटी मार्केट में रिटर्न के मामले में स्मॉलकैप सबसे आगे रहे। निफ्टी स्मॉलकैप 250 ने अप्रैल से सितंबर के बीच 23 फीसदी रिटर्न दिया। वहीं, निफ्टी मिडकैप 150 में 13 फीसदी की बढ़त रही। दूसरी तरफ निफ्टी 50 सिर्फ 2 फीसदी चढ़ा। इस तरह स्मॉलकैप का रिटर्न लार्जकैप से 21 प्रतिशत अंक ज्यादा रहा। मिडकैप ने भी Nifty 50 के मुकाबले 11 प्रतिशत अंक बेहतर परफॉर्म किया।
शेयरों में तेजी के साथ म्यूचुअल फंड के आंकड़े भी स्मॉल और मिडकैप में निवेशकों की दिलचस्पी को दिखाते हैं। AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में स्मॉलकैप फंड्स में 7,973 करोड़ रुपये का निवेश आया। वहीं, मिडकैप फंड्स में 6,989 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो हुआ। दोनों कैटेगरी को मिलाकर करीब 14,962 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो अगस्त में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में आए कुल 29,328 करोड़ रुपये के नेट इनफ्लो का लगभग आधा है। इससे पता चलता है कि घरेलू निवेशकों की इक्विटी में दिलचस्पी बनी हुई है और स्मॉलकैप तथा मिडकैप फंड्स में भी लगातार पैसा जा रहा है।
इक्विटी की तेजी के उलट इस बार कीमती धातुओं की परफॉर्मेंस कमजोर रही। H1 FY27 में सोने की कीमत में 10 फीसदी की गिरावट आई, जबकि चांदी 15 फीसदी नीचे रही। यह पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही से बिल्कुल अलग तस्वीर है। H1 FY26 में सोने ने 23 फीसदी और चांदी ने 36 फीसदी का रिटर्न दिया था। यानी एक साल में सोने के प्रदर्शन में 33 प्रतिशत अंक का बदलाव आया। चांदी में यह अंतर और भी बड़ा रहा। उसका रिटर्न 36 फीसदी की तेजी से बदलकर 15 फीसदी की गिरावट में आ गया। कुल अंतर 51 प्रतिशत अंक रहा।
H1 FY26 में सोना और चांदी इक्विटी से आगे थे। लेकिन H1 FY27 में कहानी पलट गई। इस बार स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों ने कीमती धातुओं को काफी पीछे छोड़ दिया। इस बदलाव की एक वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भी रही। H1 FY27 में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव करीब 92 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि H1 FY26 में यह लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल था। कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर पड़ा। इसका असर अलग-अलग एसेट क्लास की परफॉर्मेंस पर भी दिखाई दिया।
अप्रैल से सितंबर 2026 के छह महीनों में रिटर्न की दौड़ में स्मॉलकैप सबसे आगे रहे। इसके बाद मिडकैप और लार्जकैप का नंबर आया। दूसरी तरफ सोने और चांदी ने निगेटिव रिटर्न दिया। हालांकि, अलग-अलग एसेट क्लास का पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता। निवेश का फैसला करते समय जोखिम, निवेश अवधि और अपने वित्तीय लक्ष्य को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)