Government Keeps PPF Interest Rate Same: नए साल के मौके पर स्मॉल सेविंग स्कीम्स में निवेश करने वालों के चेहरे खिले हुए हैं। सरकार ने छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में कोई कटौती नहीं की है, जैसा कि अनुमान जताया जा रहा था।
PPF Interest Rate latest update: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सहित स्मॉल सेविंग स्कीम्स में निवेश करने वालों को नए साल की पहली खुशी मिल गई है। सरकार ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। माना जा रहा था कि छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है। यदि ऐसा होता तो PPF की ब्याज दर 49 साल में सबसे कम पहुंच जाती। हालांकि, सरकार ने इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया है। यह स्मॉल सेविंग स्कीम्स में निवेश करने वालों के लिए सरकार की तरफ से न्यू ईयर गिफ्ट है।
सरकार हर तिमाही ब्याज दरों की समीक्षा करती है। जनवरी-मार्च (Q4FY26) पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), पोस्ट ऑफिस FD, सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) जैसी स्मॉल सेविंग स्कीम्स के लिए ब्याज दरों को यथावत रखा गया है। वित्त मंत्रालय ने समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में बदलाव न करने का फैसला लिया है। पिछले काफी समय से ब्याज दरें अपरिवर्तित रही हैं। माना जा रहा था कि इस बार सरकार ब्याज घटाने का फैसला ले सकती है, लेकिन सरकार ने निवेशकों को तोहफा देते हुए कोई बदलाव नहीं किया।
| योजना का नाम | ब्याज |
| सुकन्या समृद्धि (SSY) योजना | 8.2% |
| सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) | 8.2% |
| नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) | 7.7% |
| किसान विकास पत्र (KVP) | 7.5% |
| पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) | 7.1% |
| सेविंग्स डिपॉजिट | 4% |
| पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (1 वर्ष) | 6.9% |
| पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (2 वर्ष) | 7.0% |
| पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (3 वर्ष) | 7.1% |
| पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (5 वर्ष) | 7.5% |
| पोस्ट ऑफिस मंथली स्कीम | 7.4% |
| रिकरिंग डिपॉजिट (5 वर्ष) | 6.7% |
सरकार PPF सहित स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर ब्याज दर तय करने के लिए जो फॉर्मूला इस्तेमाल करती है, वो 10-साल के गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ (G-Sec) बॉन्ड यील्ड और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित होता है। 2025 की आखिरी तिमाही में अधिकांश समय 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 6.5-6.6% के आसपास रही है। ऐसे में कुछ एक्सपर्ट मान रहे थे कि छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज को कम किया जा सकता है। यदि सरकार ब्याज दरें घटाने का फैसला लेती, तो न केवल निवेशकों को बड़ा झटका लगता। बल्कि ऐसी योजनाओं के प्रति आकर्षण भी कम हो सकता है। फिलहाल जनवरी-मार्च (Q4FY26) तिमाही तक ब्याज दरें पहले वाली ही बनी रहेंगी।