Windfall Tax on Petrol Diesel: मिडिल ईस्ट युद्ध और महंगे कच्चे तेल के बीच सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर पहली बार विंडफॉल टैक्स लगाया है। वही, डीजल और ATF पर टैक्स घटाया गया है।
SAED on Petrol: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सीधे भारत के पेट्रोल पंप तक पहुंच चुका है। सरकार ने एक तरफ पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ तेल कंपनियों और निर्यातकों पर शिकंजा कसने के लिए विंडफॉल टैक्स में भी बड़ा बदलाव कर दिया है। सरकार अब घरेलू बाजार में ईंधन की कमी और महंगाई दोनों को काबू में रखने की कोशिश में जुट गई है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर पहली बार 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगा दिया है। इसे स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) कहते हैं। मिडिल ईस्ट संकट के बाद पहली बार पेट्रोल पर SAED लगाया गया है। हालांकि, घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
मिडिल ईस्ट संकट के चलते जो ब्रेंट क्रूड पहले करीब 73 डॉलर प्रति बैरल था, वह अब 100 डॉलर के ऊपर पहुंच चुका है। तेल महंगा हुआ तो कंपनियों के लिए विदेशों में पेट्रोल-डीजल बेचना ज्यादा फायदे का सौदा बनने लगा। सरकार को डर था कि अगर निर्यात तेजी से बढ़ा, तो देश के अंदर ईंधन की कमी और कीमतों में और उछाल आ सकता है। यही वजह है कि विंडफॉल टैक्स का सहारा लिया गया। सरकार चाहती है कि कंपनियां घरेलू बाजार को प्राथमिकता दें और सिर्फ ऊंचे दाम देखकर विदेशों में तेल बेचने न भागें।
केप्लर का डेटा बताता है कि साल 2025 में भारत ने 4 लाख बैरल पेट्रोल और 6 लाख बैरल डीजल का एक्सपोर्ट किया था। 2025 में जनवरी से नवंबर तक भारतीय रिफाइनरियों को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से करीब 52 अरब डॉलर की कमाई हुई थी।
डीजल पर यह टैक्स 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी ATF पर 33 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। सरकार पिछले कुछ महीनों से लगातार टैक्स में बदलाव कर रही है। 26 मार्च को डीजल निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.5 रुपये प्रति लीटर ड्यूटी लगाई गई थी। फिर 11 अप्रैल को इसे बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये कर दिया गया। बाद में 30 अप्रैल की समीक्षा में टैक्स घटाकर 23 रुपये और 33 रुपये किया गया। अब एक बार फिर नई दरें लागू कर दी गई हैं।
इस बीच आम आदमी की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। शुक्रवार सुबह तेल कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए। सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से लागत काफी बढ़ गई है और उसी के हिसाब से रेट एडजस्ट किए गए हैं। फिलहाल सरकार की कोशिश यही दिख रही है कि घरेलू बाजार में ईंधन की सप्लाई बनी रहे। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट का तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।